अब मशहूर शायरों को पढ़िये ऑनलाइन

दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशन में यह कार्यक्रम राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद ने तैयार किया। परिषद के निदेशक डॉ.मुहम्मद हमिदुल्ला भट ने बताया कि इस कार्य में करीब पांच वर्ष का समय लगा है। इस मौके पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार उर्दू के प्रचार प्रसार के लिए ऐसा स्वरूप प्रदान करना चाहती है,जिससे नई परिस्थितियों में इसकी प्रासंगिकता कायम रहे।
मंत्रालय का कहना है कि इससे जहां एक ओर भाषा का प्रचार होगा वहीं दूसरी ओर लोग शायरी को भी जिदा रख पायेगें। जो बढ़ती आधुनिकतावाद की वजह से दम तोड़ती जा रही थी। लोगों ने फेसबुक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वाकई में यह एक सफल और सराहनीय कदम है। आखिर शायरियां हमारी धरोहर हैं और धरोहर को सहेज कर रखना हम सभी का कर्तव्य है। आखिर ये ही सब कुछ तो है जो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को देगें।












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