Surya Shani Yuti Yog: शनि और सूर्य के करीब आते ही इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, जमकर बरसेगा पैसा
Surya Shani Yuti:पंचांग के मुताबिक सूर्य और शनि एक दूसरे के दुश्मन हैं लेकिन कभी-कभी इनका साथ आना कुछ राशियों के लिए अच्छा हो जाता है, साल 2025 में ये सुखद संयोग होने जा रहा है।
14 जनवरी को सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो उस दिन शनि की युति होगी जिसका प्रभाव सभी राशियों पर तो सकारात्मक पड़ेगा लेकिन 4 राशियों पर स्पेशल कृपा होगी।और ये 4 राशियां हैं सिंह, मिथुन, कन्या और मकर।

इन सभी के तरक्की के योग हैं तो वहीं इन राशियों पर अपार लक्ष्मी माता की कृपा होगी तो वहीं ये राशियां रिश्तों के मामले में भी धनवान रहेंगी।
इसलिए इन सभी राशि वालों को प्रतिदिन शनि और सूर्य चालीसा पाठ करना चाहिए, ऐसा करने से इनके ऊपर आने वाली सारी परेशानियों का अंत होगा और इन्हें हर तरह के सुख की प्राप्ति होगी।
शनि चालीसा (Surya Shani Yuti)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
शनि चालीसा चौपाई
- जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
- चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
- परम विशाल मनोहर भाला।
- टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
- हिय माल मुक्तन मणि दमके॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा। प
- ल बिच करैं अरिहिं संहारा॥ पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
- सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
- जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
- पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥
- राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
- बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥
- लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥
- रावण की गति-मति बौराई।
- रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥ दियो कीट करि कंचन लंका।
- बजि बजरंग बीर की डंका॥ नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
- चित्र मयूर निगलि गै हारा॥ हार नौलखा लाग्यो चोरी।
- हाथ पैर डरवायो तोरी॥
- भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
- विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
- हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
- आपहुं भरे डोम घर पानी॥
- तैसे नल पर दशा सिरानी।
- भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
- श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥
- तनिक विलोकत ही करि रीसा।
- नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
- पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
- बची द्रौपदी होति उघारी॥
- कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥ र
- वि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
- लेकर कूदि परयो पाताला॥ शेष देव-लखि विनती लाई।
- रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
- वाहन प्रभु के सात सुजाना।
- जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
- जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
- सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
- गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
- हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
- गर्दभ हानि करै बहु काजा।
- सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
- जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
- मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
- जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥
- तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
- लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥
- समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
- जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥
- अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
- करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥
- जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
- विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥
- पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥
- कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥
शनि चालीसा दोहा (Surya Shani Yuti)
- पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।
- करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥
सूर्य चालीसा (Surya Shani Yuti)
दोहा॥
- कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग,
- पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥
॥चौपाई॥
- जय सविता जय जयति दिवाकर,
- सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥
- भानु पतंग मरीची भास्कर,
- सविता हंस सुनूर विभाकर॥
- विवस्वान आदित्य विकर्तन,
- मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
- अम्बरमणि खग रवि कहलाते,
- वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥
- सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,
- मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
- अरुण सदृश सारथी मनोहर,
- हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥
- मंडल की महिमा अति न्यारी,
- तेज रूप केरी बलिहारी॥
- उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते,
- देखि पुरन्दर लज्जित होते॥
- मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर,
- सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
- पूषा रवि आदित्य नाम लै,
- हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥
- द्वादस नाम प्रेम सों गावैं,
- मस्तक बारह बार नवावैं॥
- चार पदारथ जन सो पावै,
- दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥
- नमस्कार को चमत्कार यह,
- विधि हरिहर को कृपासार यह॥
- सेवै भानु तुमहिं मन लाई,
- अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥
- बारह नाम उच्चारन करते,
- सहस जनम के पातक टरते॥
- उपाख्यान जो करते तवजन,
- रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥
- धन सुत जुत परिवार बढ़तु है,
- प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
- अर्क शीश को रक्षा करते,
- रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥
- सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत,
- कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
- भानु नासिका वासकरहुनित,
- भास्कर करत सदा मुखको हित॥
- ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे,
- रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
- कंठ सुवर्ण रेत की शोभा,
- तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥
- पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर,
- त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
- युगल हाथ पर रक्षा कारन,
- भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥
- बसत नाभि आदित्य मनोहर,
- कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
- जंघा गोपति सविता बासा,
- गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥
- विवस्वान पद की रखवारी,
- बाहर बसते नित तम हारी॥
- सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै,
- रक्षा कवच विचित्र विचारे॥
- अस जोजन अपने मन माहीं,
- भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
- दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै,
- जोजन याको मन मंह जापै॥
- अंधकार जग का जो हरता,
- नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
- ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही,
- कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
- मंद सदृश सुत जग में जाके,
- धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
- धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा,
- किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
- भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों,
- दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
- परम धन्य सों नर तनधारी,
- हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
- अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन,
- मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
- भानु उदय बैसाख गिनावै,
- ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
- यम भादों आश्विन हिमरेता,
- कातिक होत दिवाकर नेता॥
- अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं,
- पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥
॥दोहा॥ (Surya Shani Yuti)
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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