Somnath Kumbhabhishek: सोमनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक क्यों खास? रुद्राभिषेक से कैसे अलग, 10 खास बातें
Somnath Mandir Kumbhabhishek: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ में आयोजित अमृत महोत्सव में हिस्सा लिया, आज का दिन बेहद ही पावन है। गौरतलब है कि भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने की उपलक्ष्य में ये महोत्सव मनाया जा रहा है।
इस खास मौके पर मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर दिव्य 'कुंभाभिषेक' किया गया, इसके लिए देशभर के 11 पवित्र तीर्थों से जल लाया गया था, जिस वक्त ये हुआ, उस वक्त का दृश्य बेहद अनुपम और दिव्य था, जिसे कि शब्दों में व्याखित करना बहुत मुश्किल है।

इस बारे में काशी के पंडित दयानंद शास्त्री ने वनइंडिया हिंदी से खास बातचीत की। उन्होंने विस्तार से बताया कि कुंभाभिषेक, सामान्य जलाभिषेक या रुद्राभिषेक से अलग क्यों हैं और ये कब किया जाता है?
कुंभाभिषेक क्या है?
पंडित दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'कुंभाभिषेक हिंदू मंदिरों में होने वाला एक अत्यंत पवित्र और भव्य धार्मिक अनुष्ठान है। इसे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का पुनर्जागरण भी कहते हैं इसलिए इसे कहीं-कहीं पर पुनर्जागरण अभिषेक भी कहते हैं, दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मंदिरों में यह परंपरा बहुत लोकप्रिय है और वहां के लोगों के लिए ये शब्द नया नहीं हैं।

कैसे होता है Kumbhabhishek का अनुष्ठान?
दयानंद शास्त्री ने कहा कि 'कुंभ यानी कलश और 'अभिषेक' यानी पवित्र स्नान। इस अनुष्ठान में वेद मंत्रों और पूजा-पाठ के बीच मंदिर के शिखर (गोपुरम) पर रखे पवित्र कलशों से जल चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि इससे मंदिर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, स्वयं देवतागण इस महान अभिषेक का हिस्सा बनते हैं, हालांकि ये आम अभिषेक की तरह नहीं है। नए मंदिर के निर्माण के बाद या मंदिर के जीर्णोद्धार या मरम्मत के बाद या 12 साल में एक बार बड़े मंदिरों में इस अभिषेक किया जाता है। इसकी विधि काफी लंबी है और इसे काफी सावधानीपूर्वक करना होता है क्योंकि जरा सी गलती आपके पूरे अनुष्ठान को खराब कर सकती है।

कुंभाभिषेक की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों से होकर गुजरती है...
- यज्ञ और हवन - कई दिनों तक वैदिक अनुष्ठान चलते हैं।
- कलश स्थापना - पवित्र जल से भरे कलश स्थापित किए जाते हैं।
- मंत्रोच्चार - विद्वान पुजारी वेद मंत्र पढ़ते हैं।
- अभिषेक - मंदिर के शिखर , देव प्रतिमा ध्वज और गर्भगृह पर पवित्र जल चढ़ाया जाता है।
- महाआरती और प्रसाद - भक्तों को आशीर्वाद और प्रसाद दिया जाता है।
मान्यता है कि कुंभाभिषेक करने से मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है, वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है और भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है। तिरुपति बालाजी मंदिर और मीनाक्षी अम्मन मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में समय-समय पर भव्य कुंभाभिषेक समारोह आयोजित किए जाते हैं।
सोमनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक का महत्व
सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग है। यहां होने वाला कुंभाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मंदिर की दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है। यहां कुंभाभिषेक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह मंदिर कई बार आक्रमणों और विध्वंस के बाद पुनर्निर्मित हुआ है। हर पुनर्स्थापना के बाद हुए कुंभाभिषेक को सनातन आस्था की पुनर्स्थापना का प्रतीक माना गया है।

सोमनाथ मंदिर की खास बातें जरूर जानिए
- सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त है।
- चंद्रदेव (सोम) ने भगवान शिव की तपस्या करके यहां श्राप से मुक्ति पाई थी। इसी कारण इसका नाम सोमनाथ पड़ा।
- इतिहास में यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों में तोड़ा गया, लेकिन हर बार पुनर्निर्मित हुआ। इसे हिंदू आस्था और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है।
- आज का भव्य मंदिर स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर दोबारा बनाया गया।
- मंदिर परिसर में एक बाणस्तंभ है, जिस पर लिखा है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक बीच में कोई भूमि नहीं है।
- मंदिर का निर्माण प्राचीन चालुक्य शैली में हुआ है, जो भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है।
- हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं, खासकर महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ उमड़ती है।














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