Christmas: क्या सच में क्रिसमस पर आते हैं 'संता क्लॉज?
नई दिल्ली। 'क्रिसमस' के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस खूबसूरत पर्व का बेसब्री से इंतजार बच्चे करते हैं, क्योंकि इस दिन उनके सपनों के बाबा यानी 'संता क्लॉज' जो उनके पास आते हैं, बहुत सारे प्यारे-प्यारे खिलौनों को लेकर, क्या सच में 'संता क्लॉज' नाम का कोई व्यक्ति होता है, जो बच्चों को प्यारे-प्यारे गिफ्ट देता है आखिर ईशू का और 'संता क्लॉज' का क्या रिलेशन है, चलिए जानते हैं विस्तार से...

संता क्लॉज
आपको जानकर हैरत होगी कि संता क्लॉज का क्रिसमस से कोई संबंध नहीं है। ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिशप संत निकोलस के नाम पर सांता क्लॉज का चलन करीब चौथी सदी में शुरू हुआ था, वे गरीब और बेसहारा बच्चों को तोहफे दिया करते थे।

भगवान की ओर से भेजा गया दूत
कुछ लोग कहते हैं संता क्लॉज, भगवान की ओर से भेजा गया दूत है, तो कुछ लोगों का मानना है कि संता क्लॉज यीशु की पिता है और इसलिए अपने बेटे के जन्मदिन पर बच्चों को गिफ्ट देने आते हैं।

'बड़ा दिन' का अर्थ
क्रिसमस को लोग 'बड़ा दिन' भी कहते हैं, बहुत सारी किताबों में लिखा है कि 25 दिसंबर को रोम के लोग रोमन उत्सव के रूप में सेलिब्रेट करते थे, इस दिन लोग एक दूसरे को ढ़ेर सारे उपहार देते थे, धीरे-धीरे ये उत्सव काफी बड़ा हो गया इसलिए इस दिन को लोग 'बड़ा दिन' कहने लगे।

काफी पावन दिन
दूसरी कथा के आधार पर सदियों पहले ये दिन भारत में मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता था, जो कि काफी पावन होता था इसलिए इसे 'बड़ा दिन' नाम दिया गया।

मैरी क्रिसमस
खैर कारण जो भी हो, क्रिसमस का पर्व अपने आप में खुशी, जोश और प्यार का प्रतीक है, केवल ईसाई धर्मवालों के लिए ही नहीं बल्कि हर धर्म और समुदाय के लिए ये पर्व अब खासा मायने रखता है। इसलिए आप भी जोरदार ढंग से स्वागत कीजिए इस बार के क्रिसमस का... मैरी क्रिसमस।












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