Shardiya Navratri 2025: माता रानी को नवरात्रि में क्यों चढ़ाते हैं नारियल-चुनरी? क्या है इसका धार्मिक महत्त्व?
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि का पर्व आते ही मंदिरों और घरों में अलग ही चहल-पहल शुरू हो जाती है। भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं। भजन-कीर्तन करते हैं और माता के दरबार को सजाते हैं। इस दौरान नारियल और चुनरी चढ़ाने की परंपरा सबसे ज्यादा देखी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि माता रानी को नारियल और चुनरी क्यों अर्पित की जाती है?
दरअसल, इन दोनों का संबंध न केवल धार्मिक आस्था से है। बल्कि इनके पीछे गहरा आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व भी छिपा है। नारियल को 'श्रीफल' कहा जाता है और चुनरी तो देवी को हमेशा ही चढ़ाई जाति है। नवरात्रि के पावन दिनों में माता रानी को नारियल और चुनरी अर्पित करने के पीछे क्या कारण है आज हम आपको बताने वाले हैं।

नारियल का महत्व
- नारियल को शास्त्रों में 'श्रीफल' कहा गया है। यह ऐसा फल है जिसका हर हिस्सा उपयोगी होता है।
- नारियल का पानी पवित्रता का प्रतीक है।
- नारियल की गिरी जीवन की मधुरता और समृद्धि का संकेत देती है।
- इसका कठोर खोल जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाने का संदेश देता है।

नवरात्रि में माता को नारियल अर्पित करना पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि नारियल चढ़ाने से घर में सुख-शांति आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
चुनरी चढ़ाने की परंपरा
देवी को चुनरी पहनाना, माता को वस्त्र अर्पित करने जैसा है। खासकर लाल चुनरी को शक्ति, साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
- चुनरी अर्पित करने से माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- यह भक्त की श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
- चुनरी को देवी का प्रिय परिधान माना जाता है, इसलिए इसे नवरात्रि में अर्पित करना अनिवार्य माना गया है।

भक्ति और आस्था का भाव
नारियल और चुनरी चढ़ाना सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि गहरी आस्था का प्रतीक है। भक्त मानते हैं कि इससे उनके परिवार पर देवी की कृपा बनी रहती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल नवरात्रि में मंदिरों और घरों में माता की प्रतिमा के सामने नारियल और चुनरी अर्पित की जाती है। लोग मानते हैं कि यह उनकी भक्ति को पूर्ण बनाता है और उनके जीवन में शुभ फल लाता है।
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