Shardiya Navratri 2022 : जानिए घटस्थापना का मुहूर्त, आरती और शुभ योग
Shardiya Navratri 2022: संवत 2079 आश्विन शुक्ल प्रतिपदा दिनांक 26 सितंबर 2022 सोमवार से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। इस दिन प्रात: 8.04 बजे तक शुक्ल योग रहेगा उसके बाद पूरे दिवसर्पयत ब्रह्म योग रहेगा। इस बार सोमवार को नवरात्रि का प्रारंभ होने के कारण देवी का आगमन गज पर होगा। यह अत्यंत शुभ है। इन शुभ योगों में प्रारंभ की गई देवी की आराधना शुभ और शीघ्र फलदायी रहेगी। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिन की रहेगी। तिथि का घट-बढ़ नहीं होने के कारण संपूर्ण नौ दिन की नवरात्रि सिद्धि साधनाओं के लिए विशेष रहेगी।

घटस्थापना मुहूर्त
- 26 सितंबर को सूर्योदय प्रात: 6.20 से लेकर 10 घटिका तक अर्थात् 10 बजकर 20 मिनट तक घटस्थापना का श्रेष्ठ समय रहेगा।
- अभिजित मुहूर्त : मध्याह्न 11.54 से 12.42 तक
- अमृत : प्रात: 6.20 से 7.49 तक
- शुभ : 9.19 से 10.48 तक
होरा अनुसार मुहूर्त
- चंद्र होरा : प्रात: 6.20 से 7.19 तक
- गुरु होरा : प्रात: 8.20 से 9.19 तक
नवरात्रि के दिन और शुभ योग
- 26 सितंबर- घटस्थापना, शारदीय नवरात्रि प्रारंभ, शैलपुत्री पूजन
- 27 सितंबर- द्वितीया, ब्रह्मचारिणी पूजन
- 28 सितंबर- तृतीया, चंद्रघंटा पूजन
- 29 सितंबर- चतुर्थी, कूष्मांडा पूजन
- 30 सितंबर- पंचमी, स्कंदमाता पूजन
- 1 अक्टूबर- षष्ठी, कात्यायनी पूजन
- 2 अक्टूबर- सप्तमी, कालरात्रि पूजन
- 3 अक्टूबर- महाअष्टमी, महागौरी पूजन
- 4 अक्टूबर- महानवमी, सिद्धिदात्री पूजन, हवन-पूजन, नवरात्रि उत्थापन
आरती
- जय अंबे गौरी मैया जय अंबे गौरी
- जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- जय अंबे गौरी मैया जय अंबे गौरी
- जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- ओम जय अंबे गौरी।
- ओम जय अंबे गौरी
- केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
- सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
- कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
- ओम जय अंबे गौरी
- शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
- धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
- ओम जय अंबे गौरी
- चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
- मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
- ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला
- आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
- बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
- ओम जय अंबे गौरी
- तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
- भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
- ओम जय अंबे गौरी
- भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
- मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
- श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
- ओम जय अंबे गौरी
- श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
- कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
- ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी॥












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