Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा आज, जानें किस मुहूर्त में रखी जाएगी चांद की रोशनी में खीर
Sharad Purnima 2025: हर साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। यह दिन अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है क्योंकि इसी दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। शरद पूर्णिमा को 'कोजागरी पूर्णिमा' और 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ दिव्य महाराास किया था और इस दिन आसमान से अमृतवर्षा भी होती है इसी कारण इस दिन लोग खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं।
इस बार ये पावन दिन 6 अक्टूबर को है। पूर्णिमा तिथि का आरंभ सोमवार दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से होगा और इसका अंत 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 18 मिनट पर होगा इसलिए पूर्णिमा तिथि आ़ज ही है।

खास बात ये है कि इस दिन पूर्णिमा पर भद्रा का साया रहेगा। दरअसल सोमवार को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से भद्रा लग जाएगी जिसका समापन रात 10 बजकर 53 मिनट पर होगा इसलिए 10.53 पीएम के बाद ही आकाश के नीचे खीर रखना सही होगा।
शरद पूर्णिमा का महत्व (Significance of Sharad Purnima 2025)
इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है इसलिए कई लोग इस दिन दूध और खीर बनाकर खुले आकाश के नीचे रखते हैं ताकि उसमें चंद्र किरणों का अमृत समा जाए। यह तिथि माता लक्ष्मी की उपासना के लिए भी विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति जागरण करता है, उसके घर में धन-समृद्धि का वास होता है। शरद पूर्णिमा की रात ध्यान, भजन और मंत्र जाप के लिए उत्तम होती है। चंद्र किरणों में बैठने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और त्वचा में चमक आती है।
शरद पूर्णिमा पूजा विधि (Sharad Purnima 2025 Puja Vidhi)
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर, धूप, पुष्प, फल और मिठाई से पूजा करें। रात में दूध में चावल डालकर खीर बनाएं। यह खीर चांद की रोशनी में रखी जाती है ताकि चंद्र किरणों का अमृत उसमें समा सके। चांद को अर्घ्य दें और माता लक्ष्मी से धन, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करें।
शरद पूर्णिमा मंत्र (Sharad Purnima Mantra)
- "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः"
- "ॐ चंद्राय नमः"
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
शरद पूर्णिमा आरती ( Sharad Purnima 2025 Aarti)
- ॐ जय जगदीश हरे आरती
- ॐ जय जगदीश हरे...
- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
- भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
- स्वामी दुःख विनसे मन का।
- सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
- स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
- तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
- स्वामी तुम अन्तर्यामी।
- पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
- स्वामी तुम पालन-कर्ता।
- मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
- स्वामी सबके प्राणपति।
- किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
- स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
- अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
- स्वामी पाप हरो देवा।
- श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
- श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
- स्वामी जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
- ॐ जय जगदीश हरे...
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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