हनुमानजी के भक्तों को कष्ट नहीं देते शनि, जानिए क्यों?
नई दिल्ली, 25 मई। हनुमानजी के भक्तों को शनिदेव कभी कष्ट नहीं देते, यह बात सर्वविदित है। इसके पीछे क्या है कारण, क्यों हनुमान के भक्तों को पीड़ा नहीं पहुंचाते शनिदेव आइए जानते हैं।

त्रेता युग में हुए महान पराक्रमी, प्रकांड विद्वान, छह शास्त्र और अठारह पुराणों के प्रकांड पंडित रावण के पराक्रम और ज्ञान का डंका पूरे ब्रह्मांड में बजता था। रावण ने सभी ग्रहों को अपने वशीभूत कर रखा था। लेकिन जब रावण पर शनि की दशा आई तो वह घबरा गया। अपने बचाव के लिए रावण ने शनि पर आक्रमण कर दिया। उसने शिव से प्राप्त त्रिशूल से शनि को घायल करके अपने बंदीगृह में उल्टा लटका दिया। लंका को जलाते समय हनुमानजी ने देखा किशनिदेव रावण के बंदीगृह में उल्टे लटके हुए हैं तो उन्होंने शनि को मुक्त करवाया। हनुमानजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शनि ने उनसे सेवा बताने को कहा। तब हनुमानजी ने कहा कितुम मेरे भक्तों को कष्ट मत देना। शनि ने यह बात तुरंत मान ली और तभी से वे हनुमानजी के भक्तों को कष्ट नहीं देते। शनि की पीड़ा के समय हनुमानजी की आराधना-सेवा करने से शनि की पीड़ा से तुरंत मुक्ति मिलती है। राम-रावण युद्ध में शनि ने रावण को परिवार सहित नष्ट करने में अपनी कुदृष्टि का प्रयोग किया। परिणामस्वरूप रावण की हार हुई।
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पांडवों को वनवास
द्वापर युग में जब पांडवों पर शनि की दशा आई तो शनिदेव ने सबसे पहले द्रौपदी की बुद्धि भ्रमित कर दी। जिस कारण उसने कौरवों के प्रति कड़वे वचन कहे। इसी के परिणामस्वरूप पांडवों को वनवास भोगना पड़ा और उसकी परिणति महाभारत युद्ध के रूप में हुई।
विक्रमादित्य की दुर्दशा
महाराजा विक्रमादित्य पर जब शनि की दशा आई तो मयूर का चित्र ही हार को निगल गया। इस कारण विक्रमादित्य पर चोरी का आरोप लगा और उन्हें तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा।
राजा हरिश्चंद्र को कष्ट
शनि के कारण ही राजा हरिश्चंद्र को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। परिवार दूर हो गया। श्मशान में चांडाल के पास नौकरी करनी पड़ी।












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