Shani Dev Ji ki Aarti: रोज करें शनिदेव की आरती, दूर हो जाएंगे कष्ट
Shani Dev Aarti Lyrics in Hindi: शनिदेव की नियमित पूजा करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत हो जाता है और उसे सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
Shani Dev ji ki Aarti: शनिदेव न्याय के देवता कहे जाते हैं। उनकी पूजा करने से इंसान का भय समाप्त हो जाता है। वो जहां रहते हैं, वहां दुख, कष्ट और चिंता का वास नहीं होता है बल्कि सुख, शांति और प्रेम का वास होता है। जो लोग शनिवार के दिन शनिदेव के साथ हनुमान जी भी पूजा करते हैं उन्हें शनिदेव अपने दोनों हाथों से प्रेम बरसाते हैं। शनिदेव की पूजा सच्चे मन से ही करनी चाहिए और उनकी पूजा करने के बाद शनि आरती जरूर करनी चाहिए। कोशिश करें कि आरती के वक्त परिवार का हर सदस्य पूजा में शामिल हो। ऐसा करने से उस घर आंगन में कभी भी सुख की विदाई नहीं होती है।

शनिदेव की आरती
- जय जय श्री शनि देव....
- श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
- नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
- जय जय श्री शनि देव....
- क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
- मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
- जय जय श्री शनि देव....
- मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
- लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
- जय जय श्री शनि देव....
- देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
- विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
- जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
शनिदेव की आरती कितने बजे होती है?
शनिदेव की पूजा अलग-अलग स्थानों में अलग तरह से होती है। कुछ लोग सुबह तो कुछ लोग शाम और कुछ लोग रात्रि में भी शनिदेव का पूजन करते हैं। आप किसी भी वक्त इनकी पूजा कर सकते हैं।
शनिदेव की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
शनिदेव की आरती दिन में दो बार (सुबह-शाम) भी हो सकती है या एक बार ( सुबह ) के वक्त हो सकती है।
शनिदेव की आरती करने के नियम
शनिदेव की आरती करते वक्त आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए। आप नहाधोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर शनिदेव की पूजा करें।
शनिदेव की पूजा कब और किस लिए करते हैं?
जो लोग शनि के दंड से पीड़ित हैं या जिनके ऊपर साढ़े साती शनिदेव चल रहे हैं, वो लोग अगर शनिवार के दिन शनि देव की पूजा पूरे मन से करते हैं तो उनके सारे कष्टों का अंत हो जाता है।
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