Sawan Pradosh Vrat 2023: वृद्धि योग में आया श्रावण प्रदोष व्रत, जानिए पूजा विधि

Sawan Pradosh Vrat 2023: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत इस बार विशेष योग-संयोग में आया है। इस प्रदोष में भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाने वाले हैं। यह प्रदोष व्रत रोहिणी नक्षत्र और वृद्धि योग में आ रहा है। इसलिए इस दिन की गई पूजा का फल अश्वमेध यज्ञ के समान मिलेगा। साथ ही इस दिन शुक्रवार होने से लक्ष्मी की भी विशेष कृपा होने वाली है। इस दिन किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय आपके जीवन के सारे संकट दूर कर देंगे।

Sawan Pradosh Vrat

14 जुलाई को प्रदोष के दिन चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र रोहिणी सूर्योदय से रात्रि 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दिन वृद्धि योग प्रात: 8 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगा। चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा और वृषभ शुक्र की राशि है और इस दिन शुक्रवार का संयोग होने से अष्टलक्ष्मी योग बना है। इस योग में भगवान शिव का पूजन करना लक्ष्मीप्रदाता कहा गया है।

कैसे करें प्रदोष की पूजा

प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर अपने घर के पूजा स्थान को साफ-स्वच्छ करें और प्रदोष व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का पूजन करें। दिन भर व्रत रखें। सायंकाल प्रदोष काल में भगवान शिव का विधिविधान से पूजन करें। अभिषेक करें। बेलपत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, जनेऊ का जोड़ा भगवान को अवश्य अर्पित करें। नैवेद्य लगाएं। कथा सुनें और आरती करें।

अष्टलक्ष्मी और वृद्धि योग में करें विशेष उपाय

  • वृषभ राशि के चंद्रमा में भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत या गाय के कच्चे दूध से करने से समस्त द्रव्य, आभूषण, भूमि की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करने के बाद उन्हें दही में शहद मिश्रित करके नैवेद्य लगाएं। इससे धन से जुड़ी सारी समस्याएं और संकट दूर हो जाता है। इस उपाय से दांपत्य जीवन में चल रहा संकट भी दूर हो जाता है।
  • प्रदोष के दिन 51 पार्थिव शिवलिंग बनाकर शमी पत्र से पूजन करने से रोग और कोर्ट कचहरी के मामले सुलझ जाते हैं।
  • धन की तंगी है, पैसों की बचत नहीं हो पा रही है तो प्रदोष पूजा में सप्तमुखी रुद्राक्ष रखें और इसे लाल धागे में पहन लें।
  • व्यापार में वृद्धि और नौकरी की समस्या है तो प्रदोष के दिन किसी शिव मंदिर में रात भर जलने वाला अखंड दीपक लगाएं।
  • इस बार का प्रदोष विशेष संयोग वाला है इसलिए आज शिवजी का पूजन करने के बाद श्री यंत्र का पूजन करें और श्रीसूक्त के पांच या 11 पाठ करें। इस उपाय से आठ प्रकार की लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

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