Sawan 2024: श्रावण में क्यों धारण करते हैं रुद्राक्ष? जानिए इसका कारण और महत्व
Rudraksha and Sawan: रुद्राक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह स्वयं उनके नेत्रों से गिरे अश्रु जल से उत्पन्न हुआ है। शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता के 25 वें अध्याय में रुद्राक्ष के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसमें रुद्राक्ष के विभिन्न भेद, कामना के अनुसार रुद्राक्ष का चयन और उनके मंत्रों का वर्णन दिया गया है।
श्रावण मास भगवान शिव का अत्यंत प्रिय मास है और अभी श्रावण चल रहा है। इसलिए श्रावण मास में रुद्राक्ष धारण करने का भी बड़ा महत्व है।

रुद्राक्ष के दर्शन से, स्पर्श से तथा उसपर जप करने से वह समस्त पापों को दूर करके मनुष्य को मोक्ष प्रदान करता है। रुद्राक्ष के अनेक भेद होते हैं। यह एकमुखी से लेकर चौदह मुखी तक के होते हैं।
रुद्राक्ष के भेद और महत्व
- एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप है। वह भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है। उसके दर्शन मात्र से ही ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाती है। यह रुद्राक्ष उन्हें पहनना चाहिए जो मोक्ष की कामना रखते हैं।
- दोमुखी रुद्राक्ष देवदेवेश्वर कहा गया है। वह संपूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला है। यह रुद्राक्ष अनजाने में हुई गोहत्या के पाप से मुक्ति दिलाता है। यह रुद्राक्ष साधकों को धारण करना चाहिए।
- तीन मुखी रुद्राक्ष साधना का साक्षात फल देने वाला कहा गया है। इसे धारण करने से सारी विद्याएं प्राप्त हो जाती है। इसे विद्यार्थियों और नई-नई चीजें सीखने वालों को अवश्य पहनना चाहिए।
- चार मुखी रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा का स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। यह रोग दूर करने वाला रुद्राक्ष है। रोगी को पहनाने से शीघ्र रोग मुक्त करता है।
- पांच मुखी रुद्राक्ष कालाग्निरुद्र रूप होता है। वह सबकुछ करने में समर्थ बनाता है। इसे धारण करने से मनुष्य असंभव कार्य भी संभव कर दिखाता है। इसे पहनने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- छह मुख वाला रुद्राक्ष कार्तिकेय का रूप है। इसे दाहिनी बांह में धारण करने से मनुष्य बलवान बनता है। उसमें साहस और शौर्य का संचार होता है। यह रुद्राक्ष अनजाने में किए अनेक पापों को दूर करता है।
- सात मुख वाला रुद्राक्ष अनंग नाम से प्रसिद्ध है। इसको धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वर्यशाली हो जाता है। इसे लक्ष्मी का प्रतीक कहा गया है। धन की चाह रखने वालों को यह रुद्राक्ष पहनना चाहिए।
- आठ मुख वाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरव स्वरूप है। इसको धारण करने से मनुष्य को पूर्णायु प्राप्त होती है।
- नौ मुखी रुद्राक्ष भैरव तथा कपिलमुनी का प्रतीक है। इसे धारण करने वाले मनुष्य के सारे कठिन कार्य भी सहज पूरे हो जाते हैं।
- दस मुखी रुद्राक्ष विष्णु स्वरूप है। इसे धारण करने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। यह रुद्राक्ष श्री प्रदाता होता है।
- ग्यारह मुखी रुद्राक्ष रुद्ररूप है। इसे पहनने से मनुष्य सर्वत्र विजयी होता है। कोर्ट कचहरी के मुकदमों में जीत दिलाता है।
- बारह मुखी रुद्राक्ष को पहनने से चेहरे पर तेज आता है। मनुष्य तेजस्वी बनता है।
- तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वेदेवों का स्वरूप है। इसे धारण करने से सौभाग्य तथा मंगल की प्राप्ति होती है।
- चौदह मुखी रुद्राक्ष परमशिव का प्रतीक है। इसे धारण करने से समस्त पापों का नाश होता है। कर्म बंधन टूट जाते हैं।
रुद्राक्ष धारण करने के मंत्र
एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के रुद्राक्षों को धारण करने के लिए अलग-अलग मंत्र हैं। यहां अंक और मंत्र दिए जा रहे हैं। अंक रुद्राक्ष के मुख का संकेत है। 1 अंक अर्थात 1 मुखी, इस प्रकार जानें-
- ऊं ह्रीं नम:
- ऊं नम:
- क्लीं नम:
- ऊं ह्रीं नम:
- ऊं ह्रीं नम:
- ऊं ह्रीं हुं नम:
- ऊं हुं नम:
- ऊं हुं नम:
- ऊं ह्रीं हुं नम:
- ऊं ह्रीं नम:
- ऊं ह्रीं हुं नम:
- ऊं क्रौं क्षौं रौं नम:
- ऊं ह्रीं नम:
- ऊं नम:












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