Sankat Chaturthi 2025: संकट चतुर्थी व्रत आज, जानिए कथा, महत्व और क्या करें और क्या ना करें?
Sankat Chaturthi 2025: आज आषाढ़ मास की संकट चतुर्थी है, इस दिन व्रत रखने से अनेक संकटों का नाश होता है इसलिए इसे संकट चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकटों को दूर करने वाला होता है। भक्ति भाव और पूर्ण श्रद्धा से इस दिन भगवान गणेश और चंद्रदेव का पूजन किया जाता है।
संकट चतुर्थी व्रत कथा (Sankat Chaturthi 2025)
पुराणों में संकट चतुर्थी से संबंधित अनेक कथाएं मिलती हैं। उन्हीं में से एक सर्वाधिक प्रामाणिक कथा यहां प्रस्तुत कर रहा हूं। बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक ब्राह्मण दंपती रहते थे। उनका नाम था सुमति और उसकी पत्नी सुशीला। वे अत्यंत धार्मिक थे किंतु उनकी कोई संतान नहीं थी। इस कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे। एक दिन नगर में एक सिद्ध संत आए।

संकष्ट चतुर्थी का व्रत करे तो अवश्य संतान की प्राप्ति होगी
सुमति उनसे मिलने पहुंचे और अपनी पीड़ा कही। संत ने सुमति को बताया कि यदि वे दोनों पति-पत्नी मिलकर संकष्ट चतुर्थी का व्रत करे तो अवश्य संतान की प्राप्ति होगी।
माता-पिता के लिए जंगल से फल-फूल लाने का निश्चय किया
सुमति ने घर आकर यह बात पत्नी को बताई। इसके बाद दोनों ने पूरे श्रद्धा भाव से संकट चतुर्थी का व्रत किया। कुछ समय बाद उसे एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। वह बालक अत्यंत चतुर, आज्ञाकारी और प्रतिभाशाली था। जब वह बड़ा हुआ तो एक बार उसने अपने माता-पिता के लिए जंगल से फल-फूल लाने का निश्चय किया।
रास्ते में उसकी भेंट एक राजा के सिपाहियों से हुई, जो किसी राजकुमार की मृत्यु के कारण अपराधी की खोज में थे। उन्होंने उस बालक को पकड़ लिया और राजा के सामने पेश कर दिया। राजा ने बिना उचित जांच के उसे अपराधी मानकर मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी।
'मुझे एक बार मेरी माता से मिलना है'( Sankat Chaturthi)
बालक ने अंतिम इच्छा पूछे जाने पर कहा: "मुझे एक बार मेरी माता से मिलना है।" राजा ने अनुमति दी। वह घर गया और अपनी माता से सारा हाल कह सुनाया। माता अत्यंत दुखी हुई, लेकिन उसे याद आया कि आज संकष्टी चतुर्थी है। उसने संकल्प लिया कि यदि भगवान गणेश मेरे पुत्र की रक्षा करेंगे तो मैं प्रति मास यह व्रत करूंगी।
उसने भगवान गणेश से प्रार्थना की और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। अगले ही दिन, जब राजा ने देखा कि असली अपराधी पकड़ा गया है, तो वह बहुत लज्जित हुआ और उस बालक से क्षमा मांगकर उसे ढेर सारा धन देकर सम्मान सहित विदा किया। इस प्रकार, गणेशजी की कृपा से एक मां का व्रत उसके पुत्र को संकट से उबार सका।
क्या करें इस दिन ( Sankat Chaturthi)
- आर्थिक संकट दूर करने के लिए संकट चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी का अभिषेक अथर्वशीर्ष से करके उन्हें 1008 शमी पत्र अर्पित करें। कुछ ही दिनों में आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगेगा।
- मानसिक तनाव और संकट दूर करने के लिए संकट चतुर्थी के दिन चंद्र को दूध का अर्घ्य दें। इस दिन चावल की खीर बनाकर उसे चंद्र के दर्शन करवाकर परिवार सहित प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से मानसिक विकार दूर होते हैं और परिवार में एक-दूसरे के प्रति प्रेम बढ़ता है।
- संकट चतुर्थी के दिन शारीरिक कष्ट दूर करने के उपाय भी किए जाते हैं। इस दिन एक पानी वाला नारियल लेकर इसे रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखे रहने दें। दूसरे दिन इस नारियल को फोड़कर इसका जल रोगी को पिलाने से शीघ्र स्वस्थ होने लगता है।
- संकट चतुर्थी के दिन गणेशजी का स्तोत्र पढ़ना चाहिए। इससे आर्थिक संकट दूर होता है और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
- आषाढ़ मास की संकट चतुर्थी की रात्रि में लक्ष्मी पूजन करने से संपदा की प्राप्ति होती है।












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