Mahashivratri 2021: जानिए पारण का समय और महत्व?
नई दिल्ली। आज पूरा देश महाशिवरात्रि का पर्व पूरी आस्था और उल्लास के साथ मना रहा है। भक्तों ने आज पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाई है तो वहीं जो लोग नदी या तालाब तक नहीं जा सकते हैं वो लोग आज घरों में ही भोलेनाथ की पूजा कर रहे हैं। बहुत लोगों ने आज प्रभु शिव के लिए उपवास भी रखा है तो ऐसे लोगों के लिए सलाह है कि वो जिस तरह से उपवास के नियमों का पालन करते हैं, ठीक उसी तरह से अपने व्रत खोलने यानी कि पारण करते वक्त भी नियम का पालन करें।

शिवरात्रि पारण समय: शुक्रवार, 12 मार्च को प्रात: 06:34 बजे के बाद
पारण करने से पहले भोलेनाथ की पूजा और ध्यान करना चाहिए और उसके बाद क्षमायाचना करना चाहिए और उसके बाद पारण करना चाहिए।
श्रीला व्यासदेव ने शिव को महान महर्षि के रूप में वर्णित किया
शिव को देवों के देव का देव कहा जाता है लेकिन असुर भी उन्हें उतना ही मानते थे। शिव इकलौते ऐसे भगवान हैं जो देवों से लेकर असुरों तक के प्रिय हैं। इंद्र-कुबेर से लेकर हिरण्यकश्यप और रावण तक शिव को सच्चे मन से पूजते थे। श्रीला व्यासदेव ने शिव को महान महर्षि के रूप में वर्णित किया है। जिसने भी उनकी निस्वार्थ होकर बिना शर्त से पूजा की, उसे शिव ने अपना आशीर्वाद दिया।
महाशिवरात्रि पर शिव भक्त करते हैं ऐसे पूजा
शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवभक्त महाशिवरात्रि पर उनका जलाभिषेक करते हैं। इस दिन शिव को भांग, धतुरा, बेलपत्र, फूल और फल चढ़ाया जाता है। भक्त पूरे दिन वृत कर शिव का ध्यान करते हैं। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से महाशिवरात्रि का वृत रखता है, भगवान उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। महाशिवरात्रि के वृत से सारे पाप भी धुल जाते हैं।
ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था
माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में महाशिवरात्रि को मध्यरात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था।
महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि
प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।












Click it and Unblock the Notifications