Rath Yatra 2022: क्यों हैं प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम की मूर्तियां अधूरी? क्या है इसका रहस्य?

नई दिल्ली, 27 जून। भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा का प्रारंभ 01 जुलाई से होने जा रहा है। विश्वप्रसिद्ध इस यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं। आपको पता है कि ये यात्रा अपने आप में काफी अलग है क्योंकि ये भारत की पहली पूजा है कि जिसमें श्रीकृष्ण के साथ उनकी प्रेमिका राधा या पत्नी रुक्मिणी की पूजा नहीं होती है, बल्कि उनके साथ उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलदाऊ की पूजा होती है, जबकि भाई-बहनों की पूजा साथ में और कहीं नहीं होती है।

अधूरी मूर्ति की पूजा

अधूरी मूर्ति की पूजा

इसके अलावा एक और खास बात इस यात्रा से जुड़ी है और वो ये कि इस यात्रा में अधूरी मूर्ति की पूजा होती है, जबकि आम तौर पर अधूरी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है। लेकिन यहां पर सदियों से अधूरी मूर्ति की पूजा होती आ रही है जिसके पीछे एक खास कारण है। दरअसल पुरी के मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम की जो मूर्ति रखी गई है वो पूरी बनी ही नहीं है, उनका सिर्फ मुंह ही बना है और ना कि हाथ-पांव। जिसके पीछे एक कथा प्रचलित है।

मूर्ति बनाने का काम देव शिल्पी विश्वकर्मा को मिला

मूर्ति बनाने का काम देव शिल्पी विश्वकर्मा को मिला

पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार पुरी के राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम की मूर्ति बनाने का काम देव शिल्पी विश्वकर्मा को सौंपा था लेकिन शिल्पी ने राजा के सामने एक शर्त रखी कि जब तक मूर्ति का काम पूरा नहीं हो जाता है, वो तब तक एक कमरे के भीतर रहेंगे और किसी को भी अंदर आने की इजाजत नहीं होगी।

 शिल्पकार विश्वकर्मा ओझल हो गए...

शिल्पकार विश्वकर्मा ओझल हो गए...

इस पर राजा ने शिल्पी की बात मान ली। वो रोज शिल्पी के घर से बाहर निकलते थे, जहां उन्हें मूर्तियां बनाने की ठक-ठक की आवाज आती थी। एक दिन वो शिल्पी के घर के सामने से गुजर रहे थे लेकिन उन्हें कोई आवाज सुनाई नहीं दी। उन्हें थोड़ी चिंता हुई और उन्होंने शिल्पी के घर का दरवाजा खोल दिया, जैसे ही राजा शिल्पी के घर में घुसे, शिल्पकार विश्वकर्मा ओझल हो गए और फिर कभी भी दोबारा सामने नहीं आए। अब राजा इंद्रद्युम्न ने विवश होकर प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाऊ बलराम की तीनों मूर्तियों को पुरी के मंदिर में रखवा दिया और तब से ही पुरी में अधूरी मूर्तियों की पूजा होती आ रही है।

 आस्था हर चीज से बड़ी है

आस्था हर चीज से बड़ी है

लेकिन कहते हैं कि आस्था हर चीज से बड़ी है और प्रेम में सबसे ज्यादा शक्ति होती है इसलिए यहां आने वाले भक्त सिर्फ प्रभु के प्रेम में यकीन रखते हैं और इन अधूरी मूर्तियों के सामने पूरी आस्था से मत्था टेकते हैं और अपनी हर समस्या का हल मांगते हैं, जिनका समाधान प्रभु जगन्नाथ उन्हें हर स्थिति में देते हैं। भगवान की इन मूर्तियां पर भक्तों का अटूट विश्वास है, जहां सिर्फ श्रद्धा से सिर झुकता है।

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