Rang Panchami 2025: रंग पंचमी आज, जानिए पूजा विधि, महत्व और आरती

Rang Panchami 2025: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है यानी कि ये त्योहार होली के 5 दिन बाद आता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान में इस त्योहार को प्रमुखता से लोग मनाते हैं। आज भी अबीर-गुलाल से लोग होली खेलते हैं और राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं।

रंग पंचमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंग पंचमी के दिन देवतागण और अदृश्य शक्तियाँ रंगों के माध्यम से आनंदित होती हैं, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मकता और प्रसन्नता का संचार होता है इसलिए लोग आज दिन वहां पर सूखे रंगों से होली खेलते हैं, जहां पर पूजा की जाती है।

Rang Panchami 2025

रंग पंचमी उत्सव की परंपराएं (Rang Panchami 2025)

  • रंग पंचमी के दिन विशेष रूप से गुलाल और सूखे रंगों का प्रयोग किया जाता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशी का इजहार करते हैं।
  • कई स्थानों पर इस दिन भव्य शोभायात्राए और झांकियां निकाली जाती हैं, जिनमें पारंपरिक नृत्य और संगीत का आयोजन होता है।
  • कुछ क्षेत्रों में इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं।
  • मालवा क्षेत्र में रंग पंचमी को फाग उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जहाँ लोग पारंपरिक गीत गाते हैं और ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते हैं।

रंग पंचमी और धुलेंडी में अंतर (Rang Panchami 2025)

रंग पंचमी और होली के दिन रंग खेलने में अंतर होता है। होली (धुलेंडी) के दिन लोग आपसी प्रेम और सौहार्द के प्रतीक रूप में रंगों का प्रयोग करते हैं, जबकि रंग पंचमी मुख्य रूप से आध्यात्मिक और दैवीय रंगों का उत्सव है। इस दिन सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप में रंग खेले जाते हैं।

राधा-कृष्ण के चरणों में अर्पित करें अबीर-गुलाल (Rang Panchami 2025)

रंगपंचमी के दिन राधा-कृष्ण की पूजा करेने के बाद उन्हें रंग अर्पित किए जाते हैं और उसके बाद प्रसाद के रूप में अबीर-गुलाल बांटा जाता है और उससे ही रंग खेलते हैं और खुशियां मनाते हैं। आज के दिन विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से घर में हमेशा सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है

रंग पंचमी की आरती (Rang Panchami 2025)

  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
  • कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
  • श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
  • मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।
  • प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।
  • देखि छवि बलिहारी जाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
  • चरणों से निकली गंगा प्यारी।
  • जिसने सारी दुनिया तारी।
  • मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
  • दास अनाथ के नाथ आप हो।
  • दुःख सुख जीवन प्यारे साथ हो।
  • हरि चरणों में शीश नवाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
  • श्री हरि दास के प्यारे तुम हो।
  • मेरे मोहन जीवन धन हो।
  • देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
  • आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ।
  • हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
  • श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
  • श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बातें करें।

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