Raksha Bandhan 2018: ये बंधन तो प्यार का बंधन है...इसलिए एक धागा भाभी के लिए भी

नई दिल्ली। रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं बल्कि यह पर्व है वचनों का, प्रेम का, त्याग का और भरोसे का, वो भरोसा जो पूरी उम्र के लिए मात्र दो धागों में सिमटा होता है, ये बंधन ये सिखाता है कि किसी भी रिश्ते की नींव ही विश्वास पर टिकी होती है। आमतौर पर बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधा करती हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि राखी केवल भाईयों को ही बांध सकते हैं।

 'चूड़ा राखी' या 'लूंबा राखी'

'चूड़ा राखी' या 'लूंबा राखी'

दरअसल राखी के त्योहार को पूरे भारत में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है, आपको जानकर हैरत होगी, राजस्थान में राखी केवल भाईयों को ही नहीं बल्कि भाभियों को भी बांधा जाती है, जिसे 'चूड़ा राखी' या 'लूंबा राखी' कहते हैं। कहते हैं कि शादी के बाद भाई के सुख-दुख की साथी उसकी पत्नी होती है इसलिए पति का वचन भी पत्नी का वचन ही हुआ इसलिए भाभी को राखी बांधने की परंपरा है यहां।

 'कान्हा जी' या 'राम जी' को राखी बांधते हैं...

'कान्हा जी' या 'राम जी' को राखी बांधते हैं...

परंपराओं के देश में कई जगह पंडितगण भी भक्तों को रक्षा-सूत्र बांधते हैं तो कई लोग 'कान्हा जी' या 'राम जी' को राखी बांधते हैं और उनसे अपने और अपने परिवार को खुश रखने और रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं।

 जनेऊ बदलने की परंपरा है...

जनेऊ बदलने की परंपरा है...

यही नहीं महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन मराठी लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। तो कुछ आदिवासी समुदाय इस दिन पेड़ों को राखी बांधकर उनसे धरा को हरा-भरा रखने की प्रार्थना करते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं।

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