Raksha Bandhan 2018: पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन किए जाने वाले प्रयोग
नई दिल्ली। श्रावण की पूर्णिमा को वर्ष की बड़ी पूर्णिमा में गिना जाता है। पवित्र श्रावण माह के अंतिम दिन आने वाली इस पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। यह दिन भाई-बहन के स्नेह का दिन तो होता ही है लेकिन शायद बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी अशुभ ग्रहों को अनुकूल करने और जन्मकुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार के अशुभ योग को दूर करने के लिए श्रावणी पूर्णिमा के दिन कई प्रयोग किए जाते हैं। शास्त्रों का कहना है इस दिन किए जाने वाले प्रयोग गुप्त रूप से करना चाहिए। यानी किसी से भी इन प्रयोगों की चर्चा न करें। यदि कोई आपको ये प्रयोग करते हुए देख ले और कुछ पूछे तो उसकी बात का जवाब ना दें। आइए जानते हैं श्रावणी पूर्णिमा के दिन किन दुर्योगों से मुक्ति के लिए क्या प्रयोग किए जाना चाहिए।

मस्तिष्क को बल
पूर्णिमा के दिन फुल मून होता है, इसलिए जन्मकुंडली में चंद्र से जुड़े दोष दूर करने के लिए यह वर्ष का सर्वश्रेष्ठ दिन माना गया है। इस दिन रात्रि के समय चांदी के कटोरे में दूध-चावल से बनी खीर खाने से मस्तिष्क को बल मिलता है। चंद्र को मजबूती मिलती है और उससे जुड़ी समस्त पीड़ाएं शांत होती हैं।
ग्रहण दोष का निवारण
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण दोष को सबसे अशुभ योगों में गिना जाता है। यदि जन्मकुंडली के किसी भी स्थान में सूर्य या चंद्र के साथ राहु या केतु बैठा हो तो ग्रहण दोष होता है। ऐसे योग वाले व्यक्ति के जीवन में कदम-कदम पर परेशानी आती है। कोई कार्य सफल नहीं होता। इस दोष के निवारण के लिए श्रावणी पूर्णिमा के दिन रात्रि में एक चांदी के बर्तन में पानी भरकर चंद्र की रोशनी में रखें। तीन घंटे रखने के बाद इस जल का सेवन लगातार 21 तक रोज थोड़ा-थोड़ा करें। इससे ग्रहण दोष से मुक्ति मिलती है।

अल्पायु योग से मुक्ति
जैसा कि नाम से ही जाहिर है, जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में अल्पायु योग होता है उसकी आयु कम होती है। ऐसे व्यक्ति की आयु बढ़ाने के लिए श्रावणी पूर्णिमा के समान कोई दूसरा दिन नहीं। इस दिन भगवान शिव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है जिससे अल्पायु योग कट जाता है और व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है। अल्पायु योग चंद्र के कारण ही बनता है, ज्योतिष के अनुसार जब कुंडली में चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थानों में हो तो अल्पायु योग बनता है। इसे काटने के लिए श्रावणी पूर्णिमा के दिन 1008 महामृत्युंजय मंत्र के जाप करते हुए गाय के घी से भगवान शिव का अभिषेक करें। शाम को चंद्रमा के उदय होने पर गाय के घी का दान करें।

नीच का चंद्रमा
जिन लोगों की जन्मकुंडली में चंद्रमा नीच का हो वे श्रावणी पूर्णिमा के दिन सायंकाल चंद्रोदय के बाद कच्चे दूध में मिश्री डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ऊं सोमेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें। गरीबों को दूध का दान करें। इससे चंद्रमा को बल मिलेगा।
कालसर्प दोष से मुक्ति
श्रावण माह भगवान शिव का माह होता है और इसका अंतिम दिन पूर्णिमा होता है। इसलिए शिवजी अपनी पूर्ण कृपा बरसाने को आतुर रहते हैं। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस दिन विशेष पूजा की जाती है। इस दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें और रात्रि के समय चांदी की डिबिया में शहद भरकर सुनसान जगह पर गाड़ दें। इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।












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