Pitru Paksha 2022: श्राद्ध करना आवश्यक है, चाहे धन का अभाव ही क्यों न हो?

नई दिल्ली, 07 सितंबर। शास्त्रों में श्राद्ध की महिमा का वर्णन करने के साथ ही यह भी बताया गया है कियदि धन का अभाव हो, श्राद्ध करने की क्षमता न हो, ऐसी परिस्थिति में श्राद्ध कैसे किया जाए। कई लोगों के पास पूजा-पाठ, पिंडदान, तर्पण, दान-दक्षिणा, ब्राह्मण भोजन आदि के लिए पर्याप्त धन नहीं होता है, ऐसे में वे कैसे अपने पितरों को संतुष्ट करें।

श्राद्ध करना आवश्यक है, चाहे धन का अभाव ही क्यों न हो?

ऐसी परिस्थितियों के लिए शास्त्रों ने कुछ व्यवस्थाएं दी हैं, जिनके पालन से श्राद्ध का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है। शास्त्र कहते हैं-

  • यदि श्राद्ध के निमित्त अन्न-वस्त्रादि खरीदने के लिए धन नहीं है तो मात्र शाक से श्राद्ध कर देना चाहिए।
  • यदि शाक खरीदने के लिए भी धन न हो तो तृण काष्ठ आदि को बेचकर पैसे इकट्ठा करें और उससे श्राद्ध करें। अधिक श्रम से यह श्राद्ध किया जाता है इसलिए इसका फल भी लाख गुना मिलता है।
  • कई बार देश विशेष या काल विशेष के कारण लकड़ियां मिलना भी संभव नहीं होता, ऐसे में घास से श्राद्ध किया जा सकता है। घास काटकर गाय को खिला दें।
  • कई बार ऐसी भी परिस्थिति आ जाती है किघास मिलना भी संभव नहीं होता तब श्राद्धकर्ता एकांत स्थान में चला जाए। अपनी दोनों भुजाएं उठाकर कहे हे मेरे पितृगण! मेरे पास श्राद्ध के उपयुक्त न तो धन है न धान्य आदि हैं। मेरे पास आपके लिए श्रद्धा और भक्ति हैं। मैं इन्हीं के द्वारा आपको तृप्त करना चाहता हूं। आप तृप्त हो जाएं। मैंने शास्त्र की आज्ञा के अनुरूप दोनों भुजाओं को आकाश में उठा रखा है।
  • इससे स्पष्ट प्रतीत हो जाता है कि मनुष्य को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।

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