पूरा हुआ रेणु का अधूरा ख्वाब

बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड के औराई हिंगना गांव में जैसे ही लतिका पहुंची वहां का माहौल ही बदल गया। रेणु के परिजनों के मुताबिक वर्ष 1950 में जब 'मैला आंचल' के रचनाकार रेणु बीमार पड़े थे तो उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती करवाया गया था। तब लतिका पीएमसीएच में नर्स थी और यहीं दोनों ने शादी का फैसला कर लिया था। इसके एक वर्ष बाद दोनों परिणय सूत्र में बंधे थे।
पूरा परिवार साथ
उस समय तो लतिका रेणु के गांव गई लेकिन कुछ समय रहने के बाद वह फिर पटना लौट आईं। परिजनों के मुताबिक वर्ष 1969 में रेणु बीमार भी पड़े थे तो लतिका फारबिसगंज में ही रेणु से मिलकर वापस लौट गई। तभी से लतिका पटना में ही रह रही थी।
चार दिन पूर्व लतिका गांव पहुंची। लतिका और पद्मा इस मिलन पर बताती हैं कि हम सौतन नहीं सगी बहनें हैं। दोनों को खुशी है कि आज पूरा परिवार एक साथ रह रहा है। वे कहती हैं, "काश अगर रेणु जी आज होते तो इस परिवार की खुशी दोगुनी होती।"उल्लेखनीय है कि रेणु को लतिका से कोई संतान नहीं थी, जबकि पद्मा से चार संतानें हुई। आज दोनों मां और सभी बच्चे एक छत के नीचे रह रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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