कुछ इस तरह थी गोंडवी की राजनीति पर कटाक्ष

उतरा है रामराज, विधायक निवास में॥
ऐसी ढेरों कविताओं के रचयिता दुनिया को छोड़कर चले गए। लखनऊ के एसजीपीजीआई में कई दिनों से पेट के गंभीर से जूझ रहे जनवादी शायर व कवि अदम गोंडवी ने आज अंतिम सांस ली। स्व. गोंडवी ऐसे कवि थे जिन्होंने अपनी धारदार कविताओं के माध्यम से आम हिन्दुस्तानी के विचारों को शब्द दिए। कभी राजनीति पर कटाक्ष किया तो कभी आम आदमी की परेशानियों को कलमबंद्ध कर दिया।
स्व. गोंडवी ने हमेशा ही आम आदमी को कागज पर उकेरा। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में पिछली 12 तारीख से अपना इलाज करा रहे शायर अदम गोंडवी का रविवार की सुबह अस्पताल में निधन हो गया। वह 64 साल के थे। वर्ष 1947 में जन्में श्री गोंडवी का असली नाम रामनाथ सिंह था। उनके दो ही कविता संग्रह (धरती की सतह पर) तथा (समय से मुठभेड़) बेहद चॢचत रहे।
चिकित्सकों के अनुसार अदम गोंडवी उदर रोग से पीडि़त थे। अदम गोंडवी ने सुबह साढ़े पांच बजे अंतिम सांस ली। दिल्ली की चकाचौंध से कोसों दूर गोंडा जिले के गांव आटा परसपुर में रहने वाले अदम गोंडवी किसान थे। कंधे पर अंगोछा डालने वाले अदम गोंडवी के हाथ हल की मूठ थाम थाम कर भले ही सख्त और खुरदरे पड़ चुके थे लेकिन उनकी शायरी के शब्द बिल्कुल नरम और दिल में उतर जाने वाले थे।
नरम शब्द भी कभी दिल पर सख्त चोट कर जाते थे। कहते हैं कि स्व. गोंडवी के शब्द जुबानी थे पर उनके निशान काफी दिनों तक दिखायी देते थे। अदम ने कहा-
जो उलझ कर रह गई फाइलों के जाल में
गांव तक वो रोशनी आयेगी कितने साल में।
उनका एक कलाम बहुत चर्चित हुआ।
गर गलतियां बाबर की थीं, जुम्मन का घर फिर क्यों जले॥
गोंडवी के निशाने पर हमेशा ही राजनीतिक लोग रहे। जाति व हिन्दू मुस्लिम एकता को निशाना बनाने वाले राजनीति दलों पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने लिखा कि -
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेडिये।
अपनी कुर्सी के लिए जज्बात को मत छेडिये॥
आइये महसूस करिये जिंदगी के ताप को,
मैं चमारों की गली तक ले चलूंगा आपको॥












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