Pavitra Ekadashi 2025: पढ़ें एकादशी की कथा, जानिए क्या है पारण टाइम?
Pavitra Ekadashi 2025: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी के महत्व के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा से इस एकादशी व्रत की केवल कथा ही सुन लेता है तो उसे वाजपेयी यज्ञ के समान फल मिल जाता है।
पवित्रा एकादशी का पर्व आज आया है। इस दिन सर्वसिद्धिदायक ऐंद्र योग भी बन रहा है। स्थान भेद से इस एकादशी को कहीं-कहीं पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन फलाहार के रूप में सिंघाड़े के आटे से बनी वस्तुओं को ग्रहण किया जाता है।

युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- पवित्रा एकादशी व्रत का व्रत यदि नि:संतान व्यक्ति करता है तो उसे श्रेष्ठ गुणों वाली संतान की प्राप्ति होती है। जिन दंपतियों की संतानें गलत मार्ग पर चली गई हैं वे यदि यह व्रत करें तो संतान सदमार्ग पर लौट आती हैं। पवित्रा एकादशी का व्रत करके इसकी कथा श्रवण एवं पठन करने से मनुष्य के अनजाने में हुए समस्त पापों का नाश हो जाता है। उसके वंश की वृद्धि होती है तथा समस्त सुख भोगकर वह बैकुंठ धाम को प्राप्त होता है।
कैसे करें Pavitra Ekadashi 2025 का पूजन
पवित्रा एकादशी के दिन प्रात: सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ या नवीन वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का पूजन करें। श्रीहरि का ध्यान करें। फल-फूल, श्रीफल, पान, सुपारी, लौंग, मिष्ठान्न आदि अपनी सामर्थ्य अनुसार भगवान नारायण को अर्पित करें। पूरे दिन निराहार रहकर रात्रि में भजन और श्रीहरि के ध्यान में समय व्यतीत करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए। दूसरे दिन व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं, उन्हें उचित दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
Pavitra Ekadashi 2025 की कथा
प्राचीन काल में एक नगर में राजा सुकेतुमान राज्य किया करते थे। राजा अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे लेकिन वे हमेशा दुखी रहते थे क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन राजा दुखी अवस्था में वन की ओर चल दिए। उन्हें समय का भान नहीं रहा और वे अत्यंत घने वन में चले गए। उन्हें बहुत प्यास लगने लगी। वह जल की तलाश में वन में भटकने लगे तभी उन्हें एक सरोवर दिखाई दिया। राजा ने देखा कि सरोवर के पास ऋषियों के आश्रम भी बने हुए हैं और बहुत से मुनि वेदपाठ, यज्ञ हवन आदि कर रहे हैं।
ऋषियों ने राजा को आशीर्वाद दिया
राजा ने मुनियों को प्रणाम किया। ऋषियों ने राजा को आशीर्वाद दिया। तब राजा ने ऋषियों से इतने सघन वन में एकत्रित होने का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि वह विश्वेदेव हैं और सरोवर के निकट स्नान के लिए आए हैं। आज पुत्रदा एकादशी है। जो मनुष्य इस दिन व्रत करता है उन्हें समस्त सिद्धियों और सुखों की प्राप्ति होती है और जिन्हें संतान नहीं हैं उन्हें उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
'हे राजन आज पुत्रदा एकादशी का व्रत है'
राजा ने यह सुनते ही कहा हे विश्वेदेवगण यदि आप सभी मुझ पर प्रसन्न हैं तब आप मुझे संतान की प्राप्ति का आशीर्वाद दें। मुनि बोले हे राजन आज पुत्रदा एकादशी का व्रत है. आप आज इस व्रत को रखें और भगवान नारायण की आराधना करें. राजा ने मुनि के कहे अनुसार विधिवत तरीके से पवित्र एकादशी का व्रत रखा और अनुष्ठान किया। व्रत के शुभ फलों द्वारा राजा को संतान की प्राप्ति हुई।
Pavitra Ekadashi 2025 का समय
- एकादशी प्रारंभ : 4 अगस्त प्रात: 11:41
- एकादशी पूर्ण : 5 अगस्त दोप 1:12
- व्रत का पारण : प्रात: 6 से 8:37












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