Maa Kalratri Chalisa: नहीं चाहिए अकाल मृत्यु तो आज जरूर करें इस चालीसा का पाठ
Navratri 7th day Devi Kalratri Puja: आज शारदीय नवरात्र का सातवां दिन है, जिसे सप्तमी कहते हैं। आज का दिन मां कालरात्रि तो समर्पित है, जिनका रूप विकराल है लेकिन ये भक्तो के कष्टों को पल भर में दूर करती हैं।
अपने बच्चों को बुरी नजरों और परेशानियों से बचाने के लिए ही मां ने ये रूप धरा था। आपको बता दें कि इन्हें मांकालरात्रि इसलिए बोला जाता है क्योंकि इनक रंग काला है।

मां कालरात्रि का यह रूप भक्तों को असुरों से रक्षा करने वाला है। उनका वाहन गधा है और वे चार भुजाओं वाली देवी हैं। देवी कालरात्रि को 'शुभंकरी' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि वे शुभ फल प्रदान करती हैं। कहते हैं कि मां काली की पूजा जो भी सच्चे मन से करता है उसके सारे कष्टों का अंत होता है और उसे कभी भी अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
मां कालरात्रि चालीसा ( Maa Kalratri Chalisa)
दोहा
- जयति जय अम्बे भवानी, कालरात्रि माता।
- तुम्हरो कृपा बिना नहीं कोई, करता जग से त्राता॥
चालीसा
- जय कालरात्रि माता जय महाकाली।
- जगत पालन हारिणी भक्तों की रखवाली॥
- तुम हो शत्रु संहारिणी सब कष्ट निवारिणी।
- सिंह पर आरूढ़ हो, सृष्टि की हो पालन कर्ता॥
- चरणों में झुकता शीश, तेरा करूं गुणगान।
- प्रेम से जो करता है, तेरा ध्यान॥
- वह निश्चय ही प्राप्त करे तेरा आशीर्वाद।
- और बनता है धर्म का सेवक, सच्चा व्रतधारी॥
- सिंह पर बैठी कालरात्रि, करे सभी का उद्धार।
- राक्षसों का संहार कर, भक्तों को दीदार॥
- तुम्हारे तेज की कोई भी, नहीं कर सकता पार।
- प्रलयकाल में करती हो, सारी सृष्टि का संहार॥
- रक्तदंतिका के रूप में, तुम हो अजेय।
- हर कष्ट और भय से, तुम ही हो हरे॥
- जपता जो नाम तेरा, हो जाता अमर।
- कष्ट और पीड़ा से, नहीं होता फिर डरे॥
दोहा
- जय कालरात्रि जगत माता, भवसागर से पार।
- तुम्हारी महिमा गाता है, सारा संसार॥
मां कालरात्रि मंत्र ( Maa Kalratri Mantra)
- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रि माता, महाकाली देवी स्वाहा।"
- "ॐ कालरात्र्यै नमः।"
मां कालरात्रि की आरती ( Maa Kalratri Aarti)
- जय काली, कालरात्रि माता।
- तुम ही हो हर संकट से त्राता॥
- तुम्हारे चरणों में जो शीश झुकाता।
- उसका संकट पल में मिट जाता॥
- तुम हो देवी महाकाली महान।
- तुमसे भयभीत हो जाता है बलवान॥
- राक्षसों का करती हो संहार।
- भक्तों का करती हो उद्धार॥
- जो सच्चे दिल से तुझे ध्याता।
- उसका हर कष्ट मिट जाता॥
- तेरा वास है हर भक्त के मन में।
- तू बसी हुई है हर इंसान के तन में॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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