Kushmanda mata ki Aarti: पढ़ें 'कूष्मांडा' माता की आरती
नई दिल्ली, 08 अक्टूबर। मां का चौथा रूप 'कूष्मांडा' का है। हर रूप की तरह ये रूप भी काफी सुंदर और मोहक है। कहा जाता है कि जब सृष्टि की रचना नहीं हुई तो मां के इसी रूप ने सृष्टि को आकार दिया था। ये ही आदिशक्ति हैं , यह ताकतवर और ज्ञान की पर्याय हैं। नवरात्रि में इनकी पूजा करने से इंसान लंबी आयु को प्राप्त होता है और यशस्वी बनता है। मां अपने सभी भक्तोंसे काफी स्नेह रखती हैं और उनकी हर तरह से रक्षा करती हैं इसलिए दुर्गा पूजा के दिनों में मां के इस रूप की विशेष पूजा करनी चाहिए।

पढ़ें 'कूष्मांडा' माता की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे।
सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
ये हैं मां के नौ रूप
- प्रथम दिन: शैलपुत्री
- दूसरी दिन: ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन: चंद्रघंटा
- चौथा दिन: कुष्मांडा
- 5वां दिन: स्कंदमाता
- 6ठवां दिन: कात्यायनी
- 7वां दिन: कालरात्रि
- 8वां दिन: महागौरी
- 9वां दिन: मां सिद्धिदात्री












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