Muharram Shayari: आज है मुहर्रम, अपनों को इन शायरियों और संदेशों से समझाएं मुहर्रम का मतलब
Muharram Shayari: आज है मुहर्रम, अपनों को इन शायरियों और संदेशों से समझाएं मुहर्रम का मतलब
नई दिल्ली, 19 अगस्त: इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक साल का पहला महीना मुहर्रम होता है। जो साल के चार पवित्र महीनों में से एक है। इस्लाम धर्म में मुहर्रम रमजान के बाद दूसरे सबसे पवित्र महीने के रूप में मनाया जाता है। इस साल मुहर्रम का इस्लामिक महीना 10 अगस्त से शुरू हुआ है। मुहर्रम के दसवें दिन को आशूरा होता है और इसी दिन मुहर्रम मनाया जाता है। इस साल 19 अगस्त को आशूरा पड़ रहा है इसलिए मुहर्रम 20 अगस्त यानी शुक्रवार को मनाया जाएगा।

मुहर्रम एक ऐसा इस्लामिक त्योहार, जिसे इस्लाम में मातम के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अलग-अलग तरीकों से अपने दुख का बयां करते हैं। मुहर्रम शब्द 'निषिद्ध' का प्रतीक है। मुसलमान इन दिनों में उपवास रखते हैं और अल्लाह से उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं। मुहर्रम इस्लाम की रक्षा के लिए ताजिया हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाया जाता है। इस दिन लोग जुलूस निकालते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग अपने शरीर को कष्ट देकर मातम मनाते है। इस दिन लोग शायरी और संदेशों के जरिए भी मुहर्रम की मतलब समझाते हैं।
1. खुदा का जिस पर रहमत हो वो हुसैन होता है, जो इंसाफ और सत्य के लिए लड़ जाए वो हुसैन होता है।
2. खुशियों का सफर तो गम से शुरू होता है, हमारा तो नया साल मुहर्रम से शुरू होता है।
3. फलक पर शोक का बादल अजीब सा छाया है, जैसे कि माह मुहर्रम का नजदीक आया है।
4. करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने, ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने, लहू जो बह गया कर्बला में, उनके मकसद को समझा तो कोई बात बने।
5. अपनी तकदीर जगाते हैं तेरे मातम से, खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से, अपन इजहारे-ए-अकीदत का सिलसिला ये है, हम नया साल मनाते हैं तेरे मातम से।
6. जिक्र-ए-हुसैन आया तो आंखें छलक पड़ी, पानी को कितना प्यार है अब भी हुसैन से।
7. सिर गैर के आगे न झुकाने वाला और नेजे पर भी कुरान सुनाने वाला, इस्लाम से क्या पूछते हो कौन है हुसैन, हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला।
8. शहादत सब के हिस्से में कहां आती है दुनिया में, मैं तुझ पे रशक करता हूँ तिरा मातम नहीं करता।
9. लफ्जों में क्या लिखूं मैं शहादत हुसैन की, कलम भी रो देता है कर्बला का मंजर सोचकर।
10. इमाम का हौसला इस्लाम जगा गया, अल्लाह के लिए उसका फर्ज आवाम को धर्म सिखा गया।












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