Mokshada Ekadashi 2025 : 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन', गीता जंयती पर करें ये काम संवर जाएगा जीवन
Mokshada Ekadashi 2025: आज मोक्षदा एकादशी है, जो कि हिंदू धर्म की सबसे शुभ और पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है। इस एकादशी को गीता जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भागवत गीता का उपदेश दिया था। यह दिन आत्मबोध, कर्तव्य और धर्म के पालन का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।

गीता जयंती का महत्व (Mokshada Ekadashi 2025)
गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन देने वाला आध्यात्मिक दर्शन है। इसमें 700 श्लोकों के माध्यम से ऐसे सिद्धांत बताए गए हैं जो हर व्यक्ति को मानसिक शांति, सही निर्णय क्षमता और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
गीता के प्रमुख श्लोक (Mokshada Ekadashi 2025)
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
अर्थ: मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता करना उसका अधिकार नहीं।
आत्मा का अमरत्व
न जायते म्रियते वा कदाचित्।
अर्थ: आत्मा का कभी जन्म नहीं होता और न ही मृत्यु।
जीवन में स्थिरता का संदेश (Mokshada Ekadashi 2025)
समत्वं योग उच्यते।
अर्थ: सुख-दुःख, लाभ-हानि में समान भाव रखना ही योग है।
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि। शुनि चैव श्वपाके च पण्डिता: समदर्शिन
अर्थ: ज्ञानियों के लिए सभी में एक ही परमात्मा का वास है।
गीता जयंती पर क्या करें? (Mokshada Ekadashi 2025)
घर पर गीता का पाठ करें।
श्रीकृष्ण के समक्ष दीप जलाएं।
किसी जरूरतमंद को भोजन या वस्त्र दान दें।
सकारात्मक कर्म का संकल्प लें।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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