Mokshada Ekadashi: इस दिन व्रत करने से मिलेगा मोक्ष, सभी कष्ट भी होंगे दूर
सभी एकादशियों में से सबसे महत्वपूर्ण एकादशी, मोक्षदा एकादशी आज पूरे भारत में मनाई जा रही है। जो भी इस दिन व्रत रखेगा, उसे मोक्ष प्राप्त होगा। मोक्षदा एकादशी हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।
नई दिल्ली। सभी एकादशियों में से सबसे महत्वपूर्ण एकादशी, मोक्षदा एकादशी आज पूरे भारत में मनाई जा रही है। जो भी इस दिन व्रत रखेगा, उसे मोक्ष प्राप्त होगा। मोक्षदा एकादशी हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में भगवत गीता का उपदेश दिया था।

पद्मपुराण में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं, 'इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप आदि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। मोक्षदा एकादशी बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है। इस दिन उपवास रखकर श्रीहरि के नाम का संकीर्तन, भक्तिगीत, नृत्य करते हुए रात्रि में जागरण करें।'
पूर्वकाल में वैखानस नामक राजा ने पर्वत मुनि के द्वारा बताए जाने पर अपने पितरों की मुक्ति के उद्देश्य से इस एकादशी का सविधि व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से राजा वैखानस के पितरों का नरक से उद्धार हो गया। कहते हैं जो मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है, उसे सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन गीता की पूजा कर उसके ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिए।
मोक्षदा एकादशी में व्रत में पूजा करते वक्त कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। पूजा का मुहूर्त शाम 4.30 बजे से लेकर 5.30 बजे तक है। पूजा करते वक्त घी में धनिये के बीज डालकर जलाएं। भगवान श्री दामोदर का रोली और चंदन से तिलक करें व उन्हें सीताफल और पिस्ता का भोग लगाएं। चंदन की माला से 'श्री कृष्ण दामोदराय नम:' का जाप करें।
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