March 2024 Vrat-Holidays List: ये है मार्च माह के व्रत-त्योहार की लिस्ट, जानिए कब है होली?
March 2024 Vrat And Festivals List: मार्च के महीने का इंतजार लोगों को काफी बेताबी से होता है क्योंकि ये अपने साथ लाता है बहुत सारा उमंग और जोश क्योंकि इसी महीने में होली का त्योहार जो आता है।

यहां हम आपके लिए लाए हैं मार्च महीने के व्रत- त्योहारों की लिस्ट, जिन्हें आप देखकर पूरे महीने की प्लानिंग कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस बार होली किस तारीख को है?
होली के व्रत और त्योहार की लिस्ट (Vrat And Festivals List)
- 6 मार्च, बुधवार: विजया एकादशी
- 8 मार्च, शुक्रवार: महाशिवरात्रि
- 8 मार्च, शुक्रवार: प्रदोष व्रत
- 10 मार्च, रविवार: फाल्गुन अमावस्या
- 14 मार्च, गुरुवार: मीन संक्रांति
- 20 मार्च, बुधवार: आमलकी एकादशी
- 22 मार्च, शुक्रवार: प्रदोष व्रत
- 24 मार्च, रविवार: होलिका दहन
- 25 मार्च, सोमवार: फाल्गुन पूर्णिमा व्रत और होली
शिवरात्रि पर जरूर करें ये आरती (Maha Shivaratri 2024 Aarti)
- ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
- ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
- वृषवाहन साजे।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
- त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
- त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
- सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
- मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
- पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
- भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
- शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
- नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
- ओम जय शिव ओंकारा।।
- त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
- ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
होलिका दहन के दिन जरूर करें ये आरती, मिलेगा धन-वैभव ( Holika Dahan Aarti)
- ओउम जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज।
- संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज।। ओउम जय ।।
- इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौ ध्यान धरैं।
- रिषि मुनिजन यश गावें, ते भव सिन्धु तरैं।। ओउम जय ।।
- सुन्दर रूप तुम्हारौ श्याम सिला सोहें। वन उपवन लखि-लखि के भक्तन मन मोहे।। ओउम जय।।
- मध्य मानसी गंग कलि के मल हरनी। तापै दीप जलावें, उतरें वैतरनी।। ओउम जय।।
- नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन-पावन सुखकारी। बायें राधा कुण्ड नहावें महा पापहारी।। ओउम जय।।
- तुम्ही मुक्ति के दाता कलियुग के स्वामी। दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तरयामी।। ओउम जय।।
- हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी। देवकीनन्दन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी।। ओउम जय।।
- जो नर दे परिकम्मा पूजन पाठ करें। गावें नित्य आरती पुनि नहिं जनम धरें।। ओउम जय।।












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