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Makar Sankranti Snan 2023: 'सारे तीरथ कई बार, गंगासागर एक बार... ' श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

माना जाता है कि गंगासागर में संक्रान्ति के दिन स्नान करने से व्यक्ति को 10 अश्वमेध यज्ञ और 1000 गाय दान करने का फल प्राप्त होता है।

 Makar Sankranti Snan 2023:

Makar Sankranti Snan 2023 (गंगासागर): आज मकर संक्रान्ति का पावन पर्व है, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश शनिवार को रात 8 बजकर 44 मिनट पर हो गया है जिसके बाद संक्रान्ति शुरू हो गई है लेकिन सूर्य अस्त होने के बाद सनातनधर्मी धार्मिक आयोजन नहीं करते हैं इसलिए उत्तरायण का पूरणकाल आज है और इसी वजह से श्रद्धालुगण आज संक्रान्ति मना रहे हैं और सुबह से ही लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान कर रहे हैं। भक्तों की एक भारी भीड़ बंगाल के गंगासागर में जुटी है, जहां कड़कड़ाती ठंड में लोग गंगास्नान कर रहे हैं।

'सारे तीरथ कई बार, गंगा सागर एक बार... '

कहा भी जाता है कि 'सारे तीरथ कई बार, गंगा सागर एक बार... ' , लाखों की संख्या में यहां जुटे लोग इसी उद्धघोष के साथ डुबकी लगा रहे हैं, गौरतलब है कि यही वो जगह है, जहां पर जहां गंगा नदी सागर में आकर मिलती हैं। माना जाता है कि गंगासागर में संक्रान्ति के दिन स्नान करने से व्यक्ति को 10 अश्वमेध यज्ञ और 1000 गाय दान करने का फल प्राप्त होता है और इसी कारण उत्तरायण पर यहां पर भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है।

सुख, शांति और संपन्नता का वास

केवल गंगासागर ही नहीं बल्कि काशी और प्रयागराज में भी इस वक्त भक्तगण लाखों की संख्या में गंगा और संगम स्नान कर रहे हैं। गौरतलब हैं कि संक्रान्ति के दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने और दान-पुण्य करने से इंसान के सारे कष्ट दूर होते हैं, वो दोषमुक्त हो जाता है, उसक कर्ज उतर जाते हैं औ उसके घर में सुख, शांति और संपन्नता आती है। गंगास्नान के बाद आज हर किसी को सूर्य को अर्ध्य भी देना चाहिए , कहते हैं ऐसा करने से इंसान को यश की प्राप्ति होती है।

जब भी आज सूर्य को अर्ध्य दें तो निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें

  • ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
  • ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।
  • ॐ ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ॐ सूर्याय नम: ॐ घृणि सूर्याय

काला तिल, चावल, दाल और गुड़ का दान करें

आज के दिन काला तिल, चावल, दाल और गुड़ का दान करने से खिचड़ी माता प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-शांति का आशीष देती हैं। आपको बता दें कि मकर संक्रान्ति का त्योहार देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है। उत्तर भारत के लोग इसे मकर संक्रान्ति और खिचड़ी कहते हैं तो वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु में इसे पोंगल कहा जाता है तो वहीं कहीं पर इसे उत्तरायण के नाम से संबोधित किया जाता है। कुल मिलाकर ये पर्व आस्था, खुशी और प्रेम का प्रतीक है।

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