Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं 'खिचड़ी'? क्या है इसके पीछे का कारण?
Why We Eat Khichdi On Makar Sankranti? मकर संक्रांति साल का पहला त्योहार होता है और इसी वजह से लोग इसका बेसब्री से इंतजार भी करते हैं क्योंकि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और सर्दी का प्रकोप कम होता है।

वैदिक धर्म के मुताबिक इस दिन से ही खरमास का अंत होता है और सारे मांगलिक काम शुरू हो जाते हैं। इस पर्व के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और काले तिल दान करते हैं।
मकर संक्रांति पर क्यों खाते हैं 'खिचड़ी'?
उत्तर भारत के इस खास पर्व को 'खिचड़ी' भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन खास तौर पर घरों में लोग 'खिचड़ी' बनाते हैं। कभी आपने सोचा कि ऐसा क्यों होता है? नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं इस बारे में।
मकर संक्रान्ति नए साल का उत्सव होता है
दरअसल मकर संक्रान्ति पर नए धान की कटाई होती है और संक्रान्ति नए साल का उत्सव है, जिसे कि नए चावल से बने भोजन के साथ सेलिब्रेट किया जाता है।
अगर ज्योतिष मान्यता की बात करें तो 'खिचड़ी' में जिन चीजों का प्रयोग किया जाता है, उनका हमारे जीवन में खास महत्व है।
चावल, उड़द की दाल, हल्दी, हरी सब्जी और नमक
दरअसल 'खिचड़ी' के लिए चावल, उड़द की दाल, हल्दी, हरी सब्जी और नमक की जरूरत पड़ती है। उड़द की दाल शनिदेव की, हल्दी बृहस्पति की, नमक शुक्र का, हरी सब्जियां बुध का और चावल चंद्रमा का प्रतीक है।
सभी ग्रहों का आशीष मिलता है
जब सारे तत्व एक साथ मिलते हैं तो हमें इन सभी ग्रहों का आशीष मिलता है और अगर आप इनमें से किसी भी ग्रह की वजह से पीड़ित हैं तो 'खिचड़ी' का सेवन मकर संक्रांति पर करने से उससे मुक्त हो जाते हैं।
इंसान को यश-बल की प्राप्ति होती है
मकर संक्रांति पर सूर्य देव को 'खिचड़ी' का भोग लगाने से इंसान को यश-बल की प्राप्ति होती है और उसके सारो पापों का अंत हो जाता है। आपको बता दें कि इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी दिन सोमवार को मनाई जाएगी।
डिसक्लेमर- यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












Click it and Unblock the Notifications