Mahakumbh 2025: महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान, जानिए मुहूर्त और समय

Mahakumbh 2025 and Mahashivratri: आज महाशिवरात्रि का व्रत और महाकुंभ 2025 का आखिरी दिन है। भगवान शिव को समर्पित इस व्रत के दिन, लोग शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और लोगों को मोक्ष मिलता है।

आज महाकुंभ का अंतिम स्नान है जिसके लिए भारी संख्या में लोगों के पहुंच रहे हैं। त्रयोदशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी को सुबह 8:54 बजे समाप्त होगी। महाशिवरात्रि पर महाकुंभ में महास्नान जारी है। सुबह से 41 लाख और अब तक कुल 65 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है।

Mahakumbh 2025

इस दौरान की गई पूजा शुभफल की प्राप्ति होगी, इस पवित्र स्नान के लिए सबसे अनुकूल समय निम्नलिखित हैं...

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:09 से सुबह 6:59
  • गोधूलि समय: शाम 6:16 से शाम 6:42
  • निशिता मुहूर्त: सुबह 12:09 से रात 12:59 (मध्यरात्रि)

महाशिवरात्रि 2025 का महत्व (Mahakumbh 2025)

  • महाशिवरात्रि का दुनिया भर के हिंदुओं के लिए बहुत आध्यात्मिक महत्व है।
  • इस पर्व पर लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं।
  • इस त्यौहार पर धार्मिक प्रवचन और जुलूस निकाले जाते हैं।
  • दीये, अगरबत्ती जलाना और फल, चावल, दूध, दही, चंदन का लेप और घी चढ़ाते हैं।

महाकुंभ में स्नान करने का लाभ (Mahakumbh 2025)

कुंभ मेले में स्नान करने से मोक्ष मिलता है और इंसान के सारे पापों का अंत हो जाता है। गंगा किनारे लगने वाला महाकुंभ इस बार 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हुआ था।

शिव दरिद्रता नाशक स्तोत्र का पाठ करें, ऐसा करने से आर्थिक तंगी दूर होगी (Mahakumbh 2025)

  • जय देव जगन्नाथ, जय शंकर शाश्वत।
  • जय सर्व-सुराध्यक्ष, जय सर्व-सुरार्चित ! ।।
  • जय सर्व-गुणातीत, जय सर्व-वर-प्रद !
  • जय नित्य-निराधार, जय विश्वम्भराव्यय ! ।।
  • जय विश्वैक-वेद्येश, जय नागेन्द्र-भूषण !
  • जय गौरी पते शम्भो, जय चन्द्रार्ध-शेखर ! ।।
  • जय कोट्यर्क-संकाश, जयानन्त-गुणाश्रय !
  • जय रुद्र-विरुपाक्ष, जय चिन्त्य-निरञ्जन ! ।।
  • जय नाथ कृपा-सिन्धो, जय भक्तार्त्ति-भञ्जन !
  • जय दुस्तर-संसार-सागरोत्तारण-प्रभो ! ।।
  • प्रसीद मे महा-भाग, संसारार्त्तस्य खिद्यतः।
  • सर्व-पाप-भयं हृत्वा, रक्ष मां परमेश्वर ! ।।
  • महा-दारिद्रय-मग्नस्य, महा-पाप-हृतस्य च।
  • महा-शोक-विनष्टस्य, महा-रोगातुरस्य च।।
  • ऋणभार-परीत्तस्य, दह्यमानस्य कर्मभिः।
  • ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य, प्रसीद मम शंकर ! ।।

महा शिवरात्रि व्रत और पूजा विधि (Mahakumbh 2025)

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव व्रत का संकल्प लें।
  • दूध, जल, शहद, दही, बेलपत्र, धतूरा और भस्म से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शिव कथा, भजन-कीर्तन करें और ध्यान करें।
  • भोग और दान - व्रत खोलने से पहले गरीबों को भोजन कराएं।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी चीज को अमल लाने के लिए किसी ज्योतिषी और किसी पंडित से अवश्य बात करें।

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