Maha Shivratri 2022: पढ़ें भगवान शिव की आरती और पाएं सुख-शांति
नई दिल्ली, 22 फरवरी। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का खासा महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से इंसान को विशेष फल की प्राप्ति होती है। उसके सारे कष्टों का अंत होता है। वैसे भी भोलेनाथ की जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा करता है उस पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है। महाशिवरात्रि को शिव चौदस या शिव चतुर्दशी भी कहा जाता है। ये पावन दिन फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिव की पूजा विशेष आरती के साथ करनी चाहिए, इससे भक्त को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव की आरती यहां पढ़ें
- जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
- ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
- एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
- हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
- दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
- त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
- अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
- चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
- सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
- कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
- जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
- प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
- काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
- नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
- त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
- कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
- जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा...
इन शिव मंत्रों का भी करें जाप
महामृत्युंजय मंत्र
- ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
- ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
- ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
- ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
- ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।












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