Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी आज, क्या है पूजा विधि और कथा?
Apara Ekadashi 2026 Kab Hai: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और इंसान के जीवन में सुख-समृद्धि आती है, इसे कहीं-कहीं 'अचला एकादशी' भी कहा जाता है।
काशी के पंडित दयानंद शास्त्री के मुताबिक एकादशी तिथि मंगलवार दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ हो चुकी थी और इसका अंत 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे होगा, उदियातिथि मान्य होने की वजह से एकादशी का व्रत बुधवार यानी कि आज रखा गया है।

- एकादशी तिथि: 13 मई 2026 (बुधवार)
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026 को दोपहर 02:52 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे
- पारण का समय: 14 मई 2026 को सुबह 05:31 से 08:14 बजे के बीच
अपरा एकादशी पूजा विधि
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें, उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।पूरे दिन व्रत रखें और अगले दिन द्वादशी तिथि में पूजा के बाद व्रत का पारण करें।
अपरा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ और तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कहा जाता है कि यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी होती है जो अपने पिछले कर्मों से मुक्ति पाना चाहते हैं।
अपरा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन समय में महिध्वज नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई वज्रध्वज उनसे ईर्ष्या करता था। एक दिन उसने राजा की हत्या कर दी और उनका शव पीपल के पेड़ के नीचे दबा दिया। राजा की अकाल मृत्यु के कारण उनकी आत्मा भटकने लगी। बाद में एक ऋषि वहां पहुंचे और अपनी दिव्य दृष्टि से पूरी घटना जान गए। ऋषि ने अपरा एकादशी का व्रत कर उसके पुण्य से राजा की आत्मा को मुक्ति दिलाई तभी से माना जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत सभी पापों और कष्टों से मुक्ति देने वाला है।














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