Lakshmi Mata Puja: साल के पहले रविवार को भूलकर भी ना करें ये काम, लक्ष्मी माता हो जाएंगी नाराज, छाएगी कंगाली
Lakshmi Mata Puja: साल 2025 का पहला रविवार 5 जनवरी को है, ये दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन खास तौर पर सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए, जो ऐसा करता है उसे सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है लेकिन इस बार का रविवार काफी खास है।
इस दिन वरियान योग भी है, इस योग में मां लक्ष्मी की पूजा करने से इंसान को माता का आशीष प्राप्त होता है और उसके ऊपर जमकर धनवर्षा होती है।

इस दिन मां की पूजा लक्ष्मी चालीसा के साथ करनी चाहिए और पूजा का अंत आरती के साथ करने से कंगाल इंसान भी धनवान बन जाता है लेकिन इस दिन घर में क्लेश करने, मांसाहारी भोजन करने से धनी से धनी व्यक्ति भी कमजोर और गरीब हो जाता है इसलिए भूलकर भी ये काम नहीं करने चाहिए।
लक्ष्मी चालीसा (Lakshmi Mata Chalisa)
- यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
- सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
- सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥
- तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
- जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥
- तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
- जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
- विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
- केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
- कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
- ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
- क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
- चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
- जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
- स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
- तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
- अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
- तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
- मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
- तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
- और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
- ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
- त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥
- जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
- ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
- पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
- विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
- पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
- सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
- बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
- प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
- बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
- करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥
- जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
- तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
- मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
- भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥
- बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
- नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
- रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
- केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥
॥ दोहा॥
- त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
- जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
- रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
- मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥
=========================================================
लक्ष्मी आरती ( (Lakshmi Mata Aarti)
- ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
- तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। मैया तुम ही जग-माता।।
- सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
- जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। मैया तुम ही शुभदाता॥
- कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। मैया सब सद्गुण आता॥
- सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। मैया वस्त्र न कोई पाता॥
- खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। मैया क्षीरोदधि-जाता॥
- रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। मैया जो कोई जन गाता॥
- उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
- ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दोहा
- महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
- पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












Click it and Unblock the Notifications