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Kushotpatini Amavasya 2025: कुशोत्पाटिनी अमावस्या आज, जानें मुहूर्त, महत्व और इसके बारे में सबकुछ

Kushotpatini Amavasya 2025: भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहा जाता है, आज ये पावन दिन आया है,इस अमावस्या के दिन कुशा को उखाड़कर उसका संग्रहण किया जाता है इसलिए इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहा जाता है। वर्ष भर अनेक प्रकार के धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ आदि में कुशा का उपयोग होता है। ग्रहण आदि में भी अन्न-जल आदि में कुशा डाली जाती है।

पितृ कार्यों में भी कुशा का उपयोग किया जाता है इसलिए कुशा उखाड़कर इसे संग्रहित करने का वर्ष में केवल एक दिन निश्चित है जो कुशोत्पाटिनी अमावस्या होता है। इस दिन विधि पूर्वक कुशा का संग्रहण किया जाता है।

Kushotpatini Amavasya 2025

कुशा एक विशेष प्रकार की घास होती है। जिसे सुखाकर संग्रहित किया जाता है। कुशोत्पाटिनी अमावस्या के दिन कुशा को निकालने के लिए कुछ नियम शास्त्रों में बताए गए हैं। शास्त्रों में दस प्रकार की कुशा का वर्णन मिलता है।

  • कुशा: काशा यवा दूर्वा उशीराच्छ सकुंदका:।
  • गोधूमा ब्राह्मयो मौन्जा दश दर्भा: सबल्वजा:।।

उपरोक्त श्लोक के अनुसार घास के दस प्रकारों में जो भी घास सुगमता से मिल जाए उसे एकत्रित कर लेना चाहिए। कुशा को किसी औजार से नहीं काटा जाता है, इसे केवल हाथ से ही उखाड़ा जाता है। कुशा की पत्तियां अखंडित होनी चाहिए। यानी पत्तियों का अग्रभाग टूटा हुआ नहीं होना चाहिए।

कुशा उखाड़ने का मुहूर्त (Kushotpatini Amavasya 2025)

शास्त्रों में कुशा उखाड़ने का समय दिन के द्वितीय प्रहर को बताया गया है। 23 अगस्त को प्रात: 9 बजकर 19 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक कुशा उखाड़ने का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। कुशा उखाड़ने वाले का मुंह उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दाहिने हाथ से एक बार में ही कुशा को निकाल लें। कुशा उखाड़ते समय \'\'ऊं हुम फट् स्वाहा'' इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इस प्रकार सविधि कुशा का संग्रहण करके रख लेना चाहिए। कुशा सदैव शुद्ध रहती है। सूर्य-चंद्र ग्रहण के दौरान भी यह अपवित्र नहीं होती है।

कैसे संग्रहित करें (Kushotpatini Amavasya 2025)

कुशा को उखाड़कर ले आने के बाद इसे साफ-स्वच्छ स्थान पर साफ कपड़े पर फैलाकर बिछा देना चाहिए, ताकि अच्छे से सूख जाए। सूखने के बाद यह पीली घास की तरह कड़ी हो जाती है। फिर इसे इकट्ठा करके मौली से बांधकर पूजन स्थान में रख लेना चाहिए। पूजन कार्य में जब आवश्यक हो इसकी एक दो पत्तियां या आवश्यकतानुसार उपयोग कर लेना चाहिए।

पूजन सामग्री की दुकानों पर यह आसानी से मिल जाती है। इससे बने हुए आसन भी बाजार में मिलते हैं जिनका उपयोग पूजन करते समय यजमान के बैठने के लिए किया जाता है।

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