CBSE Row: कौन है Coempt EduTeck का मालिक? पवन खेड़ा के आरोपों के बाद चर्चा में आई हैदराबाद की कंपनी
CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर शुरू हुआ ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े काम में जिस निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई, उसके चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखती।
उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के दौरान सामने आई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, CBSE ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है और सामने आए मामलों की जांच की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा का हमला
सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि CBSE के OSM प्रोजेक्ट के लिए Coempt EduTeck Private Limited को क्यों चुना गया और क्या कंपनी का पूरा बैकग्राउंड जांचा गया था।
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खेड़ा ने कहा कि छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है और परीक्षा व्यवस्था में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था के पीछे कई सवाल हैं जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि शुरुआत में टेंडर प्रक्रिया में केवल Tata Consultancy Services (TCS) शामिल थी। इसके बाद एक चरण ऐसा भी आया जब कोई कंपनी सामने नहीं आई। बाद में अंतिम दौर में TCS और Coempt दोनों ने भाग लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में आखिर Coempt को कैसे चुना गया और इस फैसले के पीछे क्या कारण थे, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
क्या है CBSE का OSM सिस्टम?
CBSE ने इस साल पहली बार देशभर में 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया। इस व्यवस्था में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके उनकी डिजिटल कॉपी परीक्षकों को भेजी जाती है, जहां वे ऑनलाइन मूल्यांकन करते हैं। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया था।
क्या है Coempt EduTeck?
विवाद के केंद्र में मौजूद Coempt EduTeck हैदराबाद की एक कंपनी है। यह कंपनी पहले Globarena Technologies Pvt Ltd के नाम से जानी जाती थी। बाद में कंपनी ने अपना नाम बदलकर Coempt Edu Tech Pvt Ltd कर लिया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और निदेशक वीएसएन राजू हैं। नाम बदलने के बावजूद कंपनी का नेतृत्व पहले की तरह उन्हीं के हाथ में बना हुआ है।
कंपनी ने कौन सा प्लेटफॉर्म दिया?
Coempt EduTeck ने CBSE को "Onmark" नाम का डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया। इसी प्लेटफॉर्म का उपयोग 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के लिए किया गया।
CBSE ने कब दिया कॉन्ट्रैक्ट?
News18 इंग्लिश की रिपोर्ट्स के मुताबिक CBSE ने 5 दिसंबर 2025 को कंपनी को यह कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इसके करीब 66 दिन बाद, 9 फरवरी 2026 को बोर्ड ने पूरे देश में OSM सिस्टम लागू करने की घोषणा कर दी। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी का चयन तय नियमों के तहत किया गया था।
आखिर Coempt को ही क्यों चुना गया?
CBSE अधिकारियों के अनुसार अंतिम चरण में Coempt और TCS दोनों तकनीकी रूप से योग्य पाए गए थे। दोनों कंपनियों के पास CMMI लेवल-5 सर्टिफिकेशन था, जिसे प्रक्रिया गुणवत्ता के क्षेत्र में सबसे उच्च स्तर माना जाता है।
इसके बाद वित्तीय बोली खोली गई। अधिकारियों के अनुसार Coempt ने प्रति उत्तर पुस्तिका लगभग 24.75 रुपये का प्रस्ताव दिया, जबकि TCS का प्रस्ताव करीब 65 रुपये प्रति कॉपी था। सरकारी खरीद नियमों के तहत सबसे कम बोली लगाने वाली योग्य कंपनी को ठेका दिया गया।
उत्तर पुस्तिकाओं में क्या हुई गड़बड़ी?
OSM लागू होने के बाद कई छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें धुंधली स्कैन कॉपियां मिलीं। कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के पन्ने गलत छात्रों से जुड़ गए या दूसरी कॉपियां अपलोड हो गईं। CBSE ने स्वीकार किया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान लगभग 20 मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान सही नहीं हुआ था।
हालांकि बोर्ड का कहना है कि करीब 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को प्रोसेस किया गया और इतने बड़े स्तर पर कुछ त्रुटियां सामने आ सकती हैं।
गलती होने पर कितना जुर्माना?
CBSE और कंपनी के बीच हुए समझौते में स्कैनिंग संबंधी गलतियों पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है। यदि किसी छात्र की उत्तर पुस्तिका गलत तरीके से स्कैन होती है या किसी दूसरे छात्र से जुड़ जाती है तो 4,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। आंशिक रूप से स्कैन हुई कॉपी पर 8,000 रुपये और पूरी तरह स्कैन न होने पर 15,000 रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है।
तेलंगाना विवाद से फिर चर्चा में कंपनी
News18 की रिपोर्ट के अनुसार, Coempt का पुराना नाम Globarena Technologies था। यह कंपनी 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम विवाद के दौरान भी चर्चा में आई थी। उस समय परीक्षा परिणामों में तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। इस मामले को लेकर कई कानूनी लड़ाइयां भी हुई थीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी हाल में इस पुराने विवाद का जिक्र करते हुए कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।
CBSE ने आरोपों को बताया गलत
CBSE ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। बोर्ड का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गईं और कंपनी का चयन निर्धारित मानकों के आधार पर हुआ। अधिकारियों ने यह भी कहा कि तेलंगाना से जुड़े मामलों की अदालतों में सुनवाई हो चुकी है और किसी प्रकार की गड़बड़ी साबित नहीं हुई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष याचिका भी खारिज हो गई थी।
CEO वीएसएन राजू ने क्या कहा?
कंपनी के CEO वीएसएन राजू ने किसी भी तकनीकी विफलता से इनकार किया है। उनका कहना है कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं मांग करने वाले लगभग 95 से 97 प्रतिशत छात्रों तक सफलतापूर्वक पहुंचाई गईं। उन्होंने दावा किया कि प्लेटफॉर्म में किसी प्रकार की सुरक्षा या तकनीकी कमी नहीं थी।
कई राज्यों में काम कर रही है कंपनी
अधिकारियों के अनुसार Coempt EduTeck फिलहाल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में भी डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े कार्य संभाल रही है।
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