Karwa Chauth Vrat 2025: छलनी से क्यों देखा जाता है चांद? क्या है इसके पीछे का राज?
Karwa Chauth Vrat 2025: सुहागिनों का लोकप्रिय पर्व करवा चौथ आज बड़ी ही श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। पति की लंबी आयु के लिए रखे जाना वाला ये उपवास काफी कठिन है क्योंकि सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक ये बिना पानी का व्रत है। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके पहले गणेश, गौरी-शंकर और चंद्रमा की पूजा करेंगी फिर चंद्रमा को अर्ध्य देकर वो अपने पति के हाथों पानी पीकर अपना उपवास खोलेंगी।
करवा चौथ की पूजा में छलनी से चांद को निहारा जाता है, जो कि इस व्रत के प्रमुख आकर्षण में से एक है। जब कोई महिला सज धजकर छलनी की ओट से अपने पति को निहारती है तो वो पल अनुपम होता है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर क्या वजह है कि लोग छलनी से चांद को निहारते हैं?

नहीं , तो चलिए आपको बताते हैं इसका राज, जिसे कि हर व्रत करने वाले को जानना काफी जरूरी है।दरअसल पुराणों के अनुसार, चांद को सौंदर्य, शीतलता और मन की शांति का प्रतीक माना गया है। छलनी से चांद देखने की परंपरा पति को चंद्रदेव के समान मानने की भावना से जुड़ी है।
'वैवाहिक जीवन भी सुखमय और शांतिपूर्ण रहे' (Karwa Chauth Vrat 2025)
महिलाएं पहले छलनी से चांद को देखती हैं, जो भगवान चंद्र का प्रतीक है, फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसका अर्थ है -जिस प्रकार चंद्रमा उज्जवल और शांत है, उसी प्रकार मेरा वैवाहिक जीवन भी सुखमय और शांतिपूर्ण रहे।
चंद्रमा ने उड़ाया था भगवान गणेश का मजाक (Karwa Chauth Vrat 2025)
तो वहीं दूसरी ओर एक कथा ये भी है कि एक बार गणेश भगवान मूस की सवारी कर रहे थे कि अचानक वो मूस से नीचे गिर पड़े। जिस पर चंद्रमा को काफी तेज हंसी आ गई इस पर गणपति जी को गुस्सा आ गया। वो बोले कि मूर्ख तू किसी के चोट पर हंसता है ना, तुझे खुद पर बड़ा अभिमान है तो जा मैं तुझे श्राप देता हूं आज के बाद तू घटता-बढ़ता रहेगा और जो कोई तुझे देखेगा ना उसे कलंक लगेगा इसलिए तेरा अब तिरस्कार होगा। जिस पर चंद्रमा घबरा गए, उन्होंने तुरंत माफी मांगी।
चंद्रमा ने गणेश भगवान से कहा कि मुझे श्राप मुक्त कर दें
लेकिन गणेश जी का गुस्सा शांत नहीं हुआ, ऐसे में चंद्रमा नारद मुनि के पास पहुंचे और अपनी बात कह सुनाए। इस पर नारद मुनि ने चंद्रमा को गणेश जी की उपासना करने को कहा, चंद्रमा ने ठीक वैसे ही किया, जिस पर गणेश भगवान प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट हुए, चंद्रमा ने गणेश भगवान से कहा कि मुझे श्राप मुक्त कर दें।

तुम्हारी परछाई की पूजा से किसी को कलंक नहीं लगेगा (Karwa Chauth Vrat 2025)
इस पर भगवान गणेश ने कहा कि 'मैं अपने शब्द तो वापस नहीं ले सकता हूं लेकिन अब तुम महीने में एक दिन पूरे आकार में होगे उस दिन पूर्णिमा होगी, तुम बहुत सुंदर होगे। उस दिन तुम पूजे जाओगे लेकिन जो कोई भी तुम्हारी छलनी से पूजा करेगा या तुम्हारी परछाई को देखेगा, उसे कलंक नहीं लगेगा बल्कि उसके यश में वृद्धि होगी।' तब से ही चांद को छलनी से निहारा जाने लगा।












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