Kark Sankranti 2025: कर्क संक्रांति आज, जानिए पूजा विधि, महत्व और खास बातें
Kark Sankranti 2025: सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने को कर्क संक्रांति कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय एवं धार्मिक घटना है। आज सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश किए हैं, इसी दिन से सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायण की ओर गति करने लगता है।
यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सूर्य की अर्द्धवार्षिक गति का संक्रमण बिंदु होता है। इस दिन से प्रकृति, पर्यावरण सबकुछ बदलने लगता है। प्रकृति में हरियाली की चादर छाने लगती है। यह संक्रांति श्रावण मास के प्रारंभ में आती है इसलिए इस दिन प्रकृति पूजन के साथ शिव पूजन भी किया जाता है।

कर्क संक्रांति का धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व (Kark Sankranti 2025)
- कर्क संक्रांति से सूर्य दक्षिणायन गमन करने लगता है, अर्थात वह पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध की ओर झुकने लगता है।
- हिंदू शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि माना गया है। इस समय भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार भगवान शंकर के हाथ में आ जाता है।
- कर्क संक्रांति के समय सूर्य जलतत्त्व की राशि कर्क में आता है और वर्षा ऋतु का प्रभाव आरंभ होता है।
- इसी समय से श्रावण मास आरंभ होता है जो शिव उपासना, व्रत, तीर्थ स्नान, और जलाभिषेक के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।
- मकर संक्रांति की तरह कर्क संक्रांति के दिन भी गंगा, नर्मदा, गोदावरी, यमुना, ताप्ती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का बड़ा महत्व बताया गया है।
- इस दिन तिल, वस्त्र, अन्न, सोना, जल कलश, छाता और जूते का दान विशेष फलदायी होता है। गरीबों को भोजन करवाना चाहिए।
सूर्य अष्टक का जप विशेष फल देता है (Kark Sankranti 2025)
- दक्षिणायण का समय पितृ तर्पण, श्राद्ध और पितरों की स्मृति के कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
- माना जाता है कि दक्षिणायण में पितृ लोक से आत्माएं अधिक निकट होती हैं।
- इस दिन सूर्य देव की उपासना, आदित्य हृदय स्तोत्र, गायत्री मंत्र या सूर्य अष्टक का जप विशेष फल देता है।
- सूर्य को जल चढ़ाना और गुड़, लाल फूल, गेहूं या लाल वस्त्र अर्पित करना शुभ होता है।
- देश के कई हिस्सों में कर्क संक्रांति पर पर्यावरण पूजन, पौधारोपण, गोसेवा और पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों की सफाई की परंपरा है।
- नेपाल, असम, झारखंड, ओडीशा आदि राज्यों में यह एक पवित्र पर्व के रूप में मनाया जाता है।
Kark Sankranti 2025 के दिन क्या करें
- प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।
- "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का 108 बार जाप करें।
- गायत्री मंत्र से सूर्य उपासना करें।
- पितरों के नाम तर्पण करें।
- गरीबों को जल, तिल, वस्त्र, जूते, गुड़ और छाता का दान करें।
- पवित्र नदियों या कुंडों में स्नान करें या घर पर ही गंगाजल से स्नान करें।












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