Jitiya Vrat Katha 2025: क्यों किया जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत? क्या है कथा और आरती?
Jitiya Vrat Katha 2025: पुत्रों की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत जीवित्पुत्रिका का निर्जला व्रत आज है। माताओं का ये उपवास काफी कठिन होता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़े श्रद्धाभाव से इस व्रत को मनाया जाता है।
जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha 2025)
पुराणों के अनुसार, एक समय नेपाल और मगध क्षेत्र में नर और मृग दोनों अपनी संतान की रक्षा के लिए चिंतित थे। तभी एक बार नर और मृगी दोनों ने जिमूतवाहन नामक नागकुमार की कथा सुनी।

जिमूतवाहन ने अपनी माता की सेवा और दूसरों की रक्षा हेतु खुद को ही गरुड़ के सामने खुद को अर्पित कर दिया था। उसकी इस महान त्याग भावना से प्रभावित होकर भगवान ने उसे जीवनदान दिया और वचन दिया कि जो भी स्त्री अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए यह व्रत करेगी, उसके पुत्र की रक्षा अवश्य होगी इसी के बाद से ही जीवित्पुत्रिका व्रत की परंपरा शुरू हुई।
जितिया व्रत का पूजा मंत्र (Jitiya Vrat Mantra)
- कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
- सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत की आरती (Jitiya Vrat Aarti)
- ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
- त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप...
- सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
- दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप....
- अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप...
- सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
- विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप...
- कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
- सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप...
- नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
- वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप
- सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
- हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप...
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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