PM Modi Cyprus President Meet: समुद्री सुरक्षा से लेकर शिपिंग तक, इजराइल के पड़ोसी साइप्रस के साथ क्या हुई डील?
PM Modi Cyprus President Meet: चार दिन के भारत दौरे पर आए साइप्रस के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के साथ कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, शिक्षा, निवेश और शिपिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा देने का फैसला किया।
इजराइल के पड़ोसी देश साइप्रस के साथ बढ़ती नजदीकी को भारत की मिडिल ईस्ट और यूरोप में मजबूत होती रणनीतिक मौजूदगी के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-साइप्रस रिश्ते अब 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप'
India और Cyprus ने अपने रिश्तों को सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं रखा बल्कि अब इसे रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। अगले साल दोनों देश राजनयिक संबंधों के 65 साल भी पूरे करेंगे। साइप्रस यूरोपियन यूनियन का सदस्य है, इसलिए भारत के लिए यह यूरोप तक पहुंच मजबूत करने का भी एक अहम रास्ता माना जा रहा है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा फोकस
बैठक में रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने का फैसला किया। साइप्रस भूमध्य सागर में बेहद अहम लोकेशन पर है और इजरायल के काफी करीब माना जाता है। ऐसे में भारत के लिए यह साझेदारी रणनीतिक रूप से काफी अहम हो जाती है। शिपिंग और समुद्री रूट्स की सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों ने साझा टास्क फोर्स बनाने की बात कही है।
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इजराइल के पड़ोसी से भारत की नई रणनीति
Israel के पड़ोसी देश साइप्रस के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी को मिडिल ईस्ट की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच भारत अपने भरोसेमंद साझेदारों का दायरा बढ़ाना चाहता है। साइप्रस यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बीच अहम लोकेशन पर मौजूद है। यही वजह है कि भारत यहां निवेश, कनेक्टिविटी और समुद्री सहयोग को मजबूत करना चाहता है ताकि आने वाले समय में व्यापार और रणनीतिक पहुंच दोनों बढ़ सकें।
निवेश, व्यापार और छात्रों के लिए नए मौके
पीएम मोदी ने बताया कि साइप्रस भारत के टॉप निवेशकों में शामिल है और पिछले 10 साल में वहां से भारत में निवेश दोगुना हुआ है। दोनों देशों ने अगले पांच साल में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट पर भी सहमति बनी है, जिससे छात्रों और प्रोफेशनल्स को फायदा हो सकता है। उच्च शिक्षा, संस्कृति और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इससे दोनों देशों के युवाओं और कारोबारियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
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यूक्रेन और वेस्ट एशिया पर भी हुई चर्चा
बैठक में सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों की बात नहीं हुई बल्कि वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि चाहे Ukraine का संघर्ष हो या वेस्ट एशिया का तनाव, भारत शांति और बातचीत के रास्ते का समर्थन करता रहेगा। दोनों नेताओं ने यह भी माना कि दुनिया की मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है। भारत और साइप्रस ने बहुपक्षीय मंचों पर भी साथ मिलकर काम करने की बात दोहराई।












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