मसूरी की जगह लाहौर में ट्रेनिंग लेंगे Bangladesh के अधिकारी, LBSNAA से क्यों बनाई दूरी? भारत को कितना खतरा?
Bangladesh और भारत के रिश्ते अगस्त 2024 में शेख हसीना के जाते ही बदल गए थे। इस आग में घी डालने का काम किया था सत्ता संभालने आए मोहम्मद यूनुस ने। उनके बाद जब Tarique Rahman प्रधानमंत्री बने तो लगा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते पहले जैसे हो जाएंगे। लेकिन अब लग रहा है कि उनका झुकाव पाकिस्तान और चीन की तरफ ज्यादा है। तारिक रहमान की सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया जो भारत से अलगाव की ओर बड़ा इशारा कर रहा है।
ट्रेनिंग के लिए अफसरों को भेजा लाहौर
दरअसल बांग्लादेश की सरकार ने अपने यहां के Civil Servants को पहली बार पाकिस्तान में मिड-करियर ट्रेनिंग देने के लिए भेजा है। ऐसे में बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती भारत के लिए अच्छी खबर नहीं कही जा सकती।

पहले LBSNAA में होती थी ट्रेनिंग
पहले बांग्लादेशी अधिकारी भारत के मसूरी स्थित Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration (LBSNAA) में ट्रेनिंग लेते थे। लेकिन 2024 के बाद से यह व्यवस्था बदल गई है।अब लाहौर की Civil Services Academy Lahore में 12 सीनियर बांग्लादेशी अधिकारी ट्रेनिंग ले रहे हैं, जिनमें एक एडिशन सेक्रेटरी और 11 ज्वॉइंट सेक्रेटरी शामिल हैं।
लाहौर में शुरू हुआ पहला बड़ा बैच
यह पहली बार है जब बांग्लादेश के इतने सीनियर ऑफीसर पाकिस्तान में इस तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस प्रोग्राम में भाग लेने वाले अधिकारी इस्लामाबाद और कराची के अन्य प्रशासनिक संस्थानों का भी दौरा कर रहे हैं।
पाकिस्तान में ट्रेनिंग का पूरा खर्च खुद इस्लामाबाद उठा रहा है
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का खर्च Pakistan खुद उठा रहा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की नई विदेश नीति का हिस्सा है, जो पहले की भारत-निर्भर व्यवस्था से अलग दिशा दिखाता है।
भारत के लिए क्या नुकसान?
पाकिस्तान में ट्रेनिंग के बाद बांग्लादेशी अफसरों पाकिस्तान की छाप दिख आने वाले दिनों में दिख सकती है। चूंकि ट्रेनिंग पाकिस्तान में हो रही है इसलिए भारत विरोधी एजेंडा भी भरने की पूरी कोशिश की जाएगी। जिससे आने वाले दिनों भारत-बांग्लादेश के अफसरों में मतभेद हो सकते हैं।
भारत के साथ पुरानी ट्रेनिंग व्यवस्था अब रुकी
पहले बांग्लादेश और भारत के बीच एक मजबूत प्रशासनिक ट्रेनिंग सिस्टम था, जो 2024 से पहले एक्टिव थी। इस व्यवस्था के तहत हजारों बांग्लादेशी अधिकारी भारत में ट्रेनिंग लेते थे, जिससे दोनों देशों के बीच प्रशासनिक समझ और सहयोग मजबूत हुआ था।
क्या कहने की कोशिश कर रहा बांग्लादेश?
बांग्लादेश यह दिखाना चाहता है कि भारत अब प्रशासनिक ट्रेनिंग का एकमात्र विकल्प नहीं है। यह कदम भारत के खिलाफ सीधा संदेश नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की डिप्लोमैटिक फ्लेक्सिबिलिटी यानी विकल्प बढ़ाने की रणनीति है।
1971 से पहले लाहौर में ही होती थी ट्रेनिंग
1947 से 1971 तक बांग्लादेश और पाकिस्तान एक ही देश थे। उस समय दोनों क्षेत्रों के अधिकारी लाहौर में ही ट्रेनिंग लेते थे। लेकिन पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तानियों पर किए गए अपराध और क्रूरता की वजह से ही बांग्लादेश का जन्म हुआ था। जिसमें भारत का रोल बेहद महत्वपूर्ण था। अब वही बांग्लादेश सब कुछ भूलकर वापस पाकिस्तान की गोद में बैठा नजर आ रहा है।
यूनुस सरकार के दौरान रिश्तों में तेजी से सुधार
मुहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन (अगस्त 2024 से फरवरी तक) के दौरान बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति में तेजी से बदलाव किया। इस दौरान पाकिस्तान के साथ संबंध जोड़ने में गर्माहट देखने को मिली।
क्या यह सिर्फ रणनीति है या स्थायी बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव पूरी तरह प्रो-पाकिस्तान रुख नहीं है, बल्कि एक बैलेंस्ड फॉरेन पॉलिसी की कोशिश है। बांग्लादेश अब भारत और पाकिस्तान दोनों से सीखकर अपनी प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना चाहता है। साथ ही ये भी दिखाना चाहता है कि उसके पास विकल्प है।
बांग्लादेश की नई कूटनीतिक दिशा
कुल मिलाकर, बांग्लादेश अब अपनी विदेश नीति को “मल्टी-एलायंस स्ट्रैटेजी” की तरफ ले जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक ट्रेनिंग तक सीमित रहेगा या भविष्य में बड़े राजनीतिक और सैन्य सहयोग तक भी जाएगा।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications