Aaj Ka Panchang: दिन शुक्रवार, तिथि पंचमी, जानिए शुभ मुहूर्त
Aaj Ka Panchang: पंचांग का प्रयोग शुभ मुहूर्त निकालने, त्योहारों की तिथि तय करने, व्रत-उपवास करने और ग्रहों की स्थिति जानने के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं कि आज के पंचांग में क्या खास है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त
| सूर्योदय का समय 🌅 | 05:43 पूर्वाह्न |
| सूर्यास्त का समय 🌇 | 06:05 अपराह्न |
| चंद्रोदय समय 🌕 | 09:13 अपराह्न |
| चंद्रास्त समय 🌑 | 10:21 पूर्वाह्न |
हिंदू कैलेंडर विवरण 📜
| तिथि | पंचमी प्रातः 09:58 तक, तत्पश्चात् षष्ठी |
| नक्षत्र | 11:58 पूर्वाह्न तक भरणी, फिर कृत्तिका |
| योग | व्याघात दोपहर 01:44 बजे तक, फिर हर्षण |
| करण | सुबह 09:58 बजे तक ताइटिला, उसके बाद गैराज |
| काम करने के दिन | शुक्रवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| विक्रम संवत | 2082 कलायुक्त |
| शक संवत | 1947 विश्वावसु, फिर सिद्धार्थी |
| गुजराती संवत | 2081 नाला |
| चंद्रमास | अश्विन (पूर्णिमंत), भाद्रपद (अमंत) |
| दाएँ/गेट | 27 |
चंद्र राशि, सूर्य राशि और नक्षत्र ♈
| चंद्र राशि (राशि) | सायं 05:30 बजे तक मेष, तत्पश्चात वृषभ |
| नक्षत्र पद | भरणी (11:58 पूर्वाह्न तक) और कृत्तिका (शाम 05:30 बजे तक) |
| सूर्य राशि (राशि) | नरसिंह |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्वा फाल्गुनी |
| सूर्य पद | पूर्वा फाल्गुनी और कृतिका |
ऋतु और संक्रांति 🍂
| द्रिक ऋतु (सीज़न) | शरद (शरद ऋतु) |
| वैदिक ऋतु (ऋतु) | वर्षा (मानसून) |
| द्रिक अयाना (संक्रांति) | दक्षिणायन |
| वैदिक अयन (संक्रांति) | दक्षिणायन |
| दिन की लंबाई | 12 घंटे 22 मिनट 35 सेकंड |
| रात की लंबाई | 11 घंटे 37 मिनट 46 सेकंड |
| मध्याह्न (सौर दोपहर) | 11:54 पूर्वाह्न |
शुभ और अशुभ समय ⏱️
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:10 पूर्वाह्न से 04:56 पूर्वाह्न तक |
| प्रातः संध्या (सुबह गोधूलि) | 04:33 पूर्वाह्न से 05:43 पूर्वाह्न तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:29 से दोपहर 12:19 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | 01:58 अपराह्न से 02:47 अपराह्न तक |
| गोधूलि मुहूर्त (शाम गोधूलि) | 06:05 अपराह्न से 06:29 अपराह्न तक |
| सायहना संध्या (शाम गोधूलि) | शाम 06:05 से शाम 07:15 बजे तक |
| अमृत कलाम | 07:34 पूर्वाह्न से 09:02 पूर्वाह्न तक |
| निशिता मुहूर्त | 11:31 PM से 12:17 AM (13 सितंबर) |
| राहु कालम् | सुबह 10:21 से 11:54 बजे तक |
| यामागांडा | 03:00 अपराह्न से 04:32 अपराह्न तक |
| गुलिकाई कलम | 07:16 पूर्वाह्न से 08:48 पूर्वाह्न तक |
| ज्वालामुखी योग | 05:43 पूर्वाह्न से 09:58 पूर्वाह्न तक |
| वर्ज्यम | 11:05 PM से 12:34 AM (13 सितंबर) |
| दुर मुहूर्तम | 08:11 पूर्वाह्न से 09:01 पूर्वाह्न तक |
| बाना | रात्रि 11:22 बजे से और दोपहर 12:19 बजे से 01:08 बजे तक |
| रवि योग और आदल योग और विडाल योग | समय अलग-अलग है, दिन भर से लेकर 13 सितंबर तक |
दिशात्मक शुभता और निवास 🧭
| होमाहुति | बृहस्पति |
| दिशा शूल (अशुभ दिशा) | पश्चिम |
| अग्निवास (अग्नि निवास) | पृथ्वी |
| चंद्र वास (चंद्र निवास) | पूर्व (शाम 5:30 बजे तक), दक्षिण (इसके बाद) |
| शिववास (शिव निवास) | नंदी पर (सुबह 09:58 बजे तक), भोजन में (बाद में) |
| राहु वास (राहु वास) | दक्षिण पूर्व |
| कुंभ चक्र | गर्भ |
कैलेंडर युग विवरण 🗓️
| कलियुग | 5126 वर्ष |
| काली अहरगना | 1872465 दिन |
| जूलियन कैलेण्डर का दिन | 30 अगस्त, 2025 ई. |
| जूलियन डे | 2460930.5 दिन |
| राष्ट्रीय नागरिक दिवस (भारत) | भाद्रपद 21, 1947 शक |
| राष्ट्रीय निरयण तिथि (भारत) | भाद्रपद 28, 1947 शक |
| लाहिड़ी अयनांशा | 24.222787 |
| राटा डाई | 739506 |
| संशोधित जूलियन दिवस | 60930 दिन |
चंद्रबलम और ताराबलम
| शुभ चंद्रबल शाम 5:30 बजे तक: | मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ |
| अगले दिन सूर्योदय तक शुभ चंद्रबल: | वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीना |
| सुबह 11:58 बजे तक शुभ मुहूर्त: | अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तरा आषाढ़, श्रवण, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद |
| अगले दिन सूर्योदय तक शुभ तरबलम: | भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, अश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वा आषाढ़, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपद, रेवती |
पंचक रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न
| पंचक रहित मुहूर्त: | समय अलग-अलग होता है, जो शुभ और अशुभ पंचक की अवधि दर्शाता है |
| उदय लग्न मुहूर्त: | समय अलग-अलग होता है, प्रत्येक राशि के लिए लग्न दर्शाता है |
दैनिक त्यौहार और कार्यक्रम 🎉
| षष्ठी श्राद्ध | 12 सितंबर |
| मासिक कार्तिगई | 12 सितंबर |
नोट: सभी समय वाराणसी को केंद्र मानकर भारतीय स्थानीय समय के अनुसार 12 घंटे के प्रारूप में दिखाए गए हैं। आधी रात (12 बजे) के बाद के घंटों को अगले दिन की तारीख के साथ अंकित किया जाता है। पंचांग में, एक दिन सूर्योदय से शुरू होता है और अगले सूर्योदय पर समाप्त होता है।












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