Hemkund Sahib Yatra 2026: हेमकुंड साहिब के लिए पहला जत्था रवाना, पंच प्यारों की अगुवाई में पवित्र यात्रा शुरू
Hemkund Sahib Yatra 2026: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 की शुरुआत गुरुवार को बेहद श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ हुई। यात्रा के पहले जत्थे को गोविंदघाट से विधिवत रवाना किया गया, जहां सिख श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
इस पवित्र यात्रा की अगुवाई 'पंज प्यारों' ने की, जो हाथों में पवित्र निशान साहिब लेकर आगे चल रहे थे। पूरे क्षेत्र में "जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल" के जयकारों और बैंड-बाजों की मधुर धुनों से आध्यात्मिक माहौल बन गया।

भक्ति और उत्साह से भरा नजर आया गोविंदघाट
यात्रा के पहले दिन गोविंदघाट गुरुद्वारा परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। कई श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ यात्रा में शामिल हुए, जबकि बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग भी इस कठिन पर्वतीय यात्रा के लिए उत्साहित दिखे।
'पंज प्यारों' की अगुवाई में जैसे ही पहला जत्था रवाना हुआ, श्रद्धालुओं ने माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस दौरान पवित्र निशान साहिब को विशेष सम्मान के साथ आगे ले जाया गया। रास्ते में श्रद्धालु गुरु वाणी का कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए।
23 मई को सुबह 10 बजे खुलेंगे पवित्र कपाट
गोविंदघाट से रवाना हुआ यह पहला जत्था आज शाम तक अपने पहले पड़ाव घांघरिया पहुंचेगा। इसके बाद कल, 23 मई 2026 की अलसुबह श्रद्धालु अंतिम 6 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी कर मुख्य गुरुद्वारे पहुंचेंगे, जहां सुबह 10:00 बजे पूरे विधि-विधान और अरदास के साथ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस साल के ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।
हेमकुंड साहिब का धार्मिक महत्व
पारंपरिक वेशभूषा में सजे, युवा, बुजुर्ग और परिवार सहित भक्तगण इस कठिन पर्वतीय यात्रा के लिए उत्साहित दिखे। जत्थे के रवाना होते ही श्रद्धालुओं ने माथा टेककर आशीर्वाद लिया। रास्ते में पवित्र निशान साहिब को विशेष सम्मान के साथ आगे बढ़ाया गया।
समुद्र तल से करीब 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिख धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। मान्यता है कि सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहीं तपस्या की थी। यह गुरुद्वारा बर्फीली पहाड़ियों और सात पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा, आस्था व आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।
हर साल मई से अक्टूबर के बीच लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यात्रा का मुख्य मार्ग गोविंदघाट से शुरू होकर घांघरिया होते हुए हेमकुंड साहिब तक जाता है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम
हेमकुंड साहिब यात्रा को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर मेडिकल कैंप, पुलिस सहायता केंद्र, राहत दल और आपदा प्रबंधन टीमें तैनात हैं। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की कि वे अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं, यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की जानकारी लें और स्वास्थ्य संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
इस यात्रा के प्रारंभ से चमोली और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय कारोबारियों में भी खुशी और उत्साह है। होटल, ढाबे, टैक्सी सेवाएँ, पोर्टर और घोड़ा-खच्चर संचालकों को इस सीजन से अच्छी आय की उम्मीद है। हेमकुंड साहिब यात्रा स्थानीय अर्थव्यवस्था और उत्तराखंड के पर्यटन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हेमकुंड यात्रा में मौसम बना चुनौती
हालांकि यात्रा के पहले दिन मौसम साफ रहा, ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड और बदलते मौसम पर प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे गर्म कपड़े, रेनकोट और ज़रूरी दवाइयाँ अपने साथ अवश्य रखें। श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना के साथ शुरू हुई हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 ने उत्तराखंड की वादियों को एक बार फिर आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है। आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के इस पवित्र धाम पहुँचने की संभावना है।














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