महाराणा प्रताप की वीरता केे कायल अकबर भी थेे, मृत्यु पर रो पड़ेे थे
महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी संवत् कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। वीरता, पराक्रम, त्याग के प्रतीक महाराणा प्रताप ने बहादुरी की ऐसी दास्तां लिखी जिसे लिखना हर किसी के बस की बात नहीं।
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आईये जानते हैं उनके बारे में खास बातें नीचे की स्लाइडों के जरिये...

कुम्भलगढ दुर्ग में
महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप की माता का नाम जैवन्ताबाई था।

कीका
महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था।

मुगलों को कई बार हराया
महाराणा प्रताप ने अपने दम पर मुगलों को कई बार हराया था।

सिद्धांतो और मूल्यों
अकबर महाराणा प्रताप केे सबसे बड़ा शत्रु थेे पर उनकी यह लड़ाई कोई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं बल्कि सिद्धांतो और मूल्यों की थी।

11 शादियां
महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थी।

हल्दीघाटी का युद्ध
हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था।

अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था
कहा जाता है कि महाराणा प्रताप की वीरता के कायल खुद अकबर थे और जब उन्होंने सुना की महाराणा प्रताप अब नहीं है तो अकबर भी रोने लगे थे।

राणा के चेतक जैसा कोई नहीं...
महाराणा प्रताप की बात हो और चेतक का जिक्र ना हो..भला ऐसा संभव है..नहीं ना.. महाराणा प्रताप और उनके प्रिय अश्व चेतक का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल और अद्दभुत है जिसके बारे में जितना लिखा जाये कम ही है। चेतक ने अपनी आखिरी सांस तक अपने स्वामी महाराणा प्रताप का साथ निभाया।












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