बॉलीवुड संगीतः कहां-कहां से गुजर गए..

निसार बालीवुड के पहले ऐसे कलाकार थे जिन्हें स्टारडम मिला था, लेकिन उनकी मृत्यु बड़ी ही दुखद परिस्थिति में हुई। उनकी मृत्यु के बाद जब लोग उनके घर पहुंचे तो वहां बैठने के लिए एक कुर्सी भी नहीं थी। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि तब अभिनय और गायन के लिए स्टार कलाकारों को भी कितने पैसे मिल पाते थे।
उन दिनों में अभिनेता के लिए जरूरी था कि वह गायक भी हो। कितने ही लोगों को अभिनय के मौके सिर्फ इसलिए नहीं मिल पाते थे, क्योंकि वे अच्छा गा नहीं पाते थे। गानों को 'सिंगल सिस्टम साउंड' के साथ एक ही बार में पूरा गाना पड़ता था। इसके लिए जरूरी था कि आवाज और फिल्मांकन दोनों साथ-साथ किया जाए।
इसका अर्थ हुआ कि संगीतकारों को खुद को कैमरे से दूर रखना होता था और अभिनय के दौरान कलाकार के साथ-साथ ही उसे भी चलते रहना होता था। कलाकार या संगीतकार में से किसी को भी दोबारा मौका नहीं मिल पाता था।
वहीं, 21वीं सदी का आज का बालीवुड काफी बदल चुका है। आज हर गाना करोड़ों की लागत से तैयार होता है। एक सामान्य संगीतकार भी आज एक फिल्म का संगीत तैयार करने के लिए 25 लाख रुपये लेता है, जबकि ए. आर. रहमान एक करोड़ रुपये तक ले रहे हैं।
ठीक इसी तरह गीतकार 50 हजार से लेकर तीन लाख तक लेते हैं, जबकि पाश्र्वगायक 25 से 50 हजार रुपये तक लेते हैं। यदि निर्माता लता मंगेशकर या आशा भोंसले जैसे गायकों से गाने गवाना चाहता है,तो इसके लिए उसे चार गुना ज्यादा कीमत देनी पड़ती है।
यानी कह सकते हैं कि गीत के लिखने से लेकर तैयार होने तक आज के निर्माता को एक मोटी रकम खर्च करनी पड़ जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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