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Govardhan Puja 2021 or Annakut : जानें गोवर्धन पूजा की कथा, पूजा का शुभ-मुहूर्त और 56 भोग के बारे में

नई दिल्ली, 05 नवंबर। दिवाली पांच दिनों का महापर्व है।, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, बड़ी दिवाली के बाद 'गोवर्धन पूजा' का नंबर आता है। आज के दिन लोग गायों, गोवर्धन पर्वत और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं। इस पर्व को 'अन्नकूट' भी कहा जाता है।

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    Govardhan Puja 2021: Govardhan Puja आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा | वनइंडिया हिंदी
    जानें गोवर्धन पूजा की कथा, पूजा का शुभ-मुहूर्त और महत्व

    मुहूर्त

    • हिंदू पंचांग के अनुसार 05 नवंबर 2021, शुक्रवार प्रतिपदा तिथि को सुबह 02 बजकर 44 मिनट से शुरू हो गई है जो कि रात्रि में 11 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी।
    • पूजा मुहूर्त - दोपहर 03:22 बजे से शाम 05:33 बजे तक
    जानें गोवर्धन पूजा की कथा, पूजा का शुभ-मुहूर्त और महत्व

    कथा

    एक बार देवराज इंद्र को अपने ऊपर काफी घमंड हो गया था, उसे लगने लगा था कि वो सर्वशक्तिमान है। लेकिन उनके अभिमान को चकनाचूर किया भगवान श्रीकृष्ण ने। दरअसल एक दिन श्रीकृष्ण ने देखा कि सभी बृजवासी अपने घरों में खास पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे हैं। श्री कृष्ण ने मां यशोदा से प्रश्न किया " आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" । तब मां ने कहा कि हम इंद्रदेव की पूजा की तैयारी कर रहे हैं। उनके लिए पकवान बना रहे हैं। इस पर कृष्ण ने एक लीला धरी, उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी लीला के रूप में प्रस्तुत कर दिया, जिससे गोकुलवासियों ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा कर दी। इस पर इंद्र बहुत नाराज हुए और उन्होंने अपना क्रोध दिखाया और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। इस पर गोकुलवासियों ने कृष्ण को कोसना शुरू कर दिया कि ये सबकुछ उनके कारण ही हुआ है, लेकिन तब कृष्ण ने अपनी कानी उंगली से गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सारे ग्रामवासियों और गायों से कहा कि आप सभी लोग इसके नीचे आ जाएं। इंद्र को यह सब देखकर और गुस्सा आया उसमे अपनी बारिश और तेज कर दी लेकिन वो किसी का कुछ बिगाड़ नहीं पाया। फिर उसे एहसास हुआ कि ये कोई साधारण बालक नहीं है इसलिए वो सच जानने के लिए ब्रह्माजी के पास पहुंचा, जहां ब्रह्माजी ने उन्हें कहा कि वो नारायण अवतार श्रीकृष्ण हैं। इतना सुनकर इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने बारिश बंद कर दी और श्रीकृष्ण से माफी मांगी।इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है और इस दिन गिरिराज को 56 भोग लगाते हैं।

    जानें गोवर्धन पूजा की कथा, पूजा का शुभ-मुहूर्त और महत्व

    जानिए क्या है 56 भोग

    • भात
    • दाल
    • चटनी
    • कढ़ी,
    • शाक की कढ़ी
    • सिखरिणी शरबत
    • बाटी
    • मुरब्बा
    • शर्करा युक्त आटा
    • बड़ा
    • मठरी
    • फेनी
    • पूरी
    • खजला
    • (घेवर)
    • (मालपुआ),
    • चोला),
    • जलेबी)
    • मेसू
    • रसगुल्ला
    • चन्द्रकला
    • महारायता
    • थूली
    • लौंगपूरी
    • खुरमा
    • दलिया
    • सौंफ युक्त
    • बिलसारू
    • लड्डू
    • साग
    • चार
    • मंडका
    • पायस
    • दही
    • गोघृत
    • मक्खन
    • मलाई
    • रबड़ी
    • पापड़
    • सीरा
    • लसिका
    • सुवत
    • मोहन
    • सुफला
    • सिता
    • फल,
    • तांबूल,
    • मोहन भोग,
    • लवण,
    • कषाय
    • मधुर,
    • तिक्त,
    • कटु,
    • अम्ल

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