Ganesh Chaturth 2024 Katha: जानिए विनायक का जन्म कैसे हुआ था? क्या है कथा?

Ganesh Chaturthi 2024 Katha Hindi: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन भगवान गणेशजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन उनकी उत्पत्ति हुई थी। पुराणों में गणेशजी के जन्म के संबंध में अनेक कथाएं मिलती हैं किंतु सर्वाधिक प्रचलित कथा यहां प्रस्तुत की जा रही है।

पुराण कथा के अनुसार एक समय महादेव स्नान के लिए भोगावती के तट पर गए। शिवजी के सारे गण भी उनके साथ चले गए। कैलाश पर्वत पर पार्वती के अलावा कोई नहीं था। इसी बीच पार्वती को भी स्नान के लिए जाना था किंतु द्वार पर सुरक्षा के लिए कोई नहीं था।

Ganesh Chaturthi Katha

इसलिए उन्होंने अपने तन के मैल से एक पुतला तैयार किया और उसका नाम गणेश रखा अर्थात् समस्त गणों के देवता।पार्वती ने उस उससे कहा कि हे पुत्र मैंने तुम्हें अपने मैल से उत्पन्न किया है। तुम मेरे पुत्र हो। मैं स्नान करने भीतर जा रही हूं, तुम द्वार पर मुदगल लेकर बैठ जाओ और जब तक मैं आज्ञा न दूं किसी को भी भीतर न आने देना।

कुछ समय बाद भोगावती से स्नान करके शिवजी कैलाश पर आए तो उन्होंने द्वार पर एक बालक को बैठा देखा। बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। शिवजी ने पूछा बालक तुम कौन हो और मुझे भीतर जाने से क्यों रोक रहे हो। बालक ने कहा भीतर मेरी माता स्नान कर रही हैं और उन्होंने आज्ञा दी है कि मैं किसी को भी भीतर न जाने दूं।

'शिवजी भोजन में विलंब होने के कारण क्रोधित हैं!'

शिवजी ने बालक को समझाया कि मैं शिव हूं। मुझे जाने दो भीतर लेकिन बालक ने बलपूर्वक उन्हें रोक दिया। इस पर शिवजी ने क्रोधित होकर बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। शिवजी भीतर गए तो पार्वती से समझा कि शिवजी भोजन में विलंब होने के कारण क्रोधित हैं तो उन्होंने दो थाली भोजन के लिए लगा दी।

'पार्वती ने कहा दूसरी मेरे पुत्र गणेश के लिए है'

शिवजी ने पूछा यह दूसरी थाली किसके लिए है तो पार्वती ने कहा दूसरी मेरे पुत्र गणेश के लिए है। आपने बाहर द्वार पर उसे नहीं देखा।शिवजी ने कहा तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा था। मैंने तो उसे उद्दंड बालक समझकर उसका सिर काट दिया। इस पर पार्वती बहुत दुखी हुई।

'मेरे पुत्र को शीघ्र जीवित कीजिए वरना मैं भी प्राण त्याग दूंगी'

उन्होंने विलाप करते हुए कहा कि मेरे पुत्र को शीघ्र जीवित कीजिए वरना मैं भी प्राण त्याग दूंगी। शिवजी ने कहा अब दोबारा वह मस्तक लगाना संभव नहीं है। पार्वती ने कहा कुछ भी कीजिए मुझे मेरा पुत्र वापस चाहिए।

'गणों को सबसे पहले एक हथिनी दिखी'

इस पर शिवजी ने अपने गणों को चारों दिशाओं में भेजा और कहा कि जो भी माता अपने पुत्र की ओर पीठ करके सो रही हो उसके बालक का सिर काटकर ले आओ। गणों को सबसे पहले एक हथिनी दिखी जो अपने बालक की ओर पीठ करके सो रही थी।

'शिवजी ने उस बालक का नाम गजानन रखा'

गणों ने उस हथिनी के बच्चे का सिर काटा और कैलाश ले आए। शिवजी ने हाथी का मस्तक बालक पर लगा दिया और बालक जीवित हो उठा। शिवजी ने उस बालक का नाम गजानन रखा। अर्थात् गज के सिर वाला। यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन हुई थी इसलिए इस दिन गणेशजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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