Ganesh Chaturthi 2018: जानिए बप्पा को क्यों कहते हैं गणपति?
नई दिल्ली। 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, जिसके लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारी चल रही है। 10 दिन तक चलने वाला गणेश उत्सव उत्साह और प्रेम का मानक है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाने वाले श्री गणेश जी के स्वागत के लिए इस समय उनके भक्तगण पूरी तरह से तैयारियों में जुटे हैं।

गणेश चतुर्थी को ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था
गणेश जी बेहद मोहिल, बुद्दिमान और ऊर्जवान माने जाते हैं और इसी वजह से इनकी पूजा करने वालों को भी ये गुण हासिल होते हैं। पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी को ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था। चतुर्थी के 10 दिन तक गणपति की पूजा की जाती है और इसके बाद इनका विसर्जन होता है।

गणों के स्वामी होने के कारण ही इन्हें 'गणपति' कहते हैं
गणों के स्वामी होने के कारण ही इन्हें 'गणपति' कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भगवान गणेश को 'केतु का देव' कहा जाता है। हाथी जैसा मुंह होने की वजह से इनका नाम 'गजानन' है। इन्हें वरदान मिला है कि बिना इनकी पूजा के कोई भी पूजा और कोई भी कार्य पूरा नहीं होगा इसी कारण उन्हें 'आदिपूज्य' कहा जाता है।

'गाणपतेय संप्रदाय'
भारत में जो संप्रदाय केवल भगवान गणेश की पूजा करता है उन्हें 'गाणपतेय संप्रदाय' कहा जाता है, जो कि मुख्य रूप से महाराष्ट्र में पाये जाते हैं।

मोदक इनका प्रिय भोजन
भगवान गणेश को भगवान शिव और माता पार्वती की दूसरी संतान माना जाता है, जिनकी दो पत्नियां हैं रिद्धि और सिद्धि है। मोदक इनका प्रिय भोजन हैं जबकि मूषक इनकी सवारी।












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