नवरात्र विशेष: पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की अराधना
आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। आज नवरात्र का प्रथम दिन है इसलिए आज के दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है इसलिए इन्हें ही प्रथम दुर्गा कहा जाता है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। मां शैलपुत्री की आराधना के लिए भक्तों को विशेष मंत्र का जाप करना चाहिए ताकि वह मां का आर्शीवाद प्राप्त कर सकें।
यह मंत्र है वन्दे वांछितलाभाय चंद्राद्र्धकृतशेखराम। वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम।।
नवरात्र के पहले ही दिन भक्त घरों में कलश की स्थापना करते हैं जिसकी पूरे नौ दिनों तक पूजा की जाती है। मां का यह अद्भुत रूप है। दाहिने हाथ में त्रिशूल व बांए हाथ में कमल का फूल लिए मां अपने पुत्रों को आर्शीवाद देने आती है। श्वेत व दिव्य रूप में मां वृषभ पर बैठी है।
कहते हैं सच्चे मन से मां से जो भी मांगो वो जरूर पूरा होता है। शैल पुत्री का रूप काफी मोहक और प्रभावशाली है इसलिए आज जातक को मन से मां की पूजा करनी चाहिए जिसके चलते उस पर आने वाले हर संकट को मां उससे दूर कर देंगी।लखनऊ के पंडित प्रदीप तिवारी के अनुसार इस बार नवरात्र नौ दिनों का है इसके अलावा नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना का मुहूर्त सूर्योदय से प्रात 7:30 तक है। 11:26 से 12:33 बजे तक अवजित मुहूर्त है इसमें कलश स्थापित करना सबसे अच्छा माना जाता है।













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