जानिए भारत के लिये कैसा रहेगा संवत् 2070
[पं. अनुज के शुक्ल] हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नये साल संवत् 2070 का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा दिनांक 11 अप्रैल दिन गुरूवार से हो रहा है। नवीन सवंत्सर का नाम पराभाव है जिसकी मन्त्रिपरिषद इस प्राकार है- राजा-गुरू, मंत्री-शनि, धनेश-चंद्र, धान्येश-सूर्य, सस्येश- मंगल, मेघेश- शुक्र, रसेश-गुरू नीरसेश-गुरू, फलेश-शुक्र, दुग्रेश-शुक्र।
संवत् 2069 की दहलीज पर पहुंचते ही स्वभातः प्रकृति के समारोहों का सिलसिला हमें अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इस अवसर पर हम एक दूसरे के लिए अच्छी कामनाएं कर सकते है। दुःखों और समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। हमें उन अवसरों का बखूबी उपयोग भी करना होगा, जो हमारे सामने उपलब्ध हो और साथ ही आने वाली चुनौतियों से पार भी पाना होगा।

संवत् 2070 का राजा गुरू है एंव मंत्री शनि है। शनि न्याय और अनुशासन का संकेतक है। गुरु और शनि आपस में मैत्री सम्बनध रखते है। मंत्री की सलाह पर निर्भर होता है, देश का विकास, सुशासन और जनता की खुशहाली मुख्य मुद्दे रहेंगे।
उग्र होगा काले धन पर आंदोलन
गुरु राजनीति, महत्वाकांक्षा व धर्म का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु व शनि के आपसी सामंजस्य से राजनिति में परिर्वतन की बयार बहेगी एंव कानून व्यवस्था में बदलाव के लिये नयें नियमों का सृजन होगा। धन भाव में चंद्र का अधिकार होने से काले धन के मुद्दे पर कोई आन्दोलन उग्र रूप ले सकता है। मेघेश शुक्र होने से इस वर्ष बारिश का योग अच्छा बन रहा है।
चुनाव समय से पहले संभव
मंत्रीपरिषद में मंगल और शुक्र के होने से देश का स्वाभिमान बरकरार रहेगा लेकिन देश में अस्थिरिता की स्थिति बनी रहेगी। शनि की मंत्री होने से चुनाव समय से पूर्व हो सकते हैं। महंगाई कम तो नहीं होगी पर नियंत्रण में जरूर आ सकती है। तमाम झंझावतों के बावजूद भी देश में आर्थिक समृद्धि आयेगी और विश्वपटल भारत की साख कायम रहेगी। मैं अपने पाठकों के लिए कामना करता हूं कि आने वाला वर्ष उनके लिए समृद्ध और खुशहाल हो।












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