Durga saptashati : कवच, अर्गला, कीलक में समाया है संपूर्ण सप्तशती का माहात्म्य
नई दिल्ली, 08 अक्टूबर। देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के सबसे चमत्कारिक मंत्र और श्लोक यदि किसी पुस्तक में हैं तो यह श्री दुर्गा सप्तशती ही है। आचार्यो ने इसे देवी भगवती का जीवंत स्वरूप कहा है। नवरात्रि में घर-घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। कई लोग अक्षमता या समयाभाव के कारण संपूर्ण सप्तशती का पाठ नहीं कर पाते वे केवल कवच, अर्गला, कीलक और क्षमायाचना करते हैं। अनेक विद्वानों का मत है किसंपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करके जो फल प्राप्त होता है उसका संपूर्ण फल शुद्धता और पवित्रता के साथ किए गए कवच, अर्गला, कीलक से प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है किकई लोग सिर्फ यही पाठ करते हैं।

- दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि के अनुसार आचमन, पंच देव पूजा, संकल्प आदि के बाद सबसे पहले देवी कवच का पाठ किया जाता है। इसमें कुल 56 श्लोक हैं जिनका पाठ शुद्ध उच्चारण के साथ किया जाना आवश्यक है।
- महर्षि मार्कण्डेय ने कहा है दुर्गा कवचधारी मनुष्य को राजा के समान सम्मान और वृद्धि प्राप्त होती है।
- कवच का पाठ करने वाला मनुष्य अपनी कीर्ति से विभूषित पृथ्वी पर सुयश के साथ रहता है। वह सुंदर, दिव्य रूप धारण करता है और कल्याणमय शिव के साथ आनंद का भागी होता है।
- कवच के बाद अर्गला स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इसमें कुल 25 श्लोक हैं।
- इसके प्रत्येक श्लोक की दूसरी लाइन में देवी से रूप, जय, यश प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।
- कवच और अर्गला के बाद कीलक किया जाता है। इसमें 14 श्लोक हैं। और अंत में क्षमायाचना की जाती है।












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